आयोग की ओर से उठाए गए इस कदम पर भी प्रतियोगियों ने सवाल उठाए हैं और पूछा कि जांच के दौरान कॉपियों में फिर से कोई हेरफेर न हो, इसकी क्या गारंटी है। छात्रों ने राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है कि आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा में आयोग ने पेपर लीक की घटना से साफ इनकार कर दिया था। अभ्यर्थियों के आंदोलन करने पर शासन ने सीधे हस्तक्षेप पर परीक्षा निरस्त की थी, वरना आयोग तो मनमानी पर उतारू था।
वहीं, पीसीएस जे मुख्य परीक्षा में कॉपी की अदला-बदली का मामला सामने आने पर अभ्यर्थी को न्यायालय की शरण में जाना पड़ा, तब आयोग ने कॉपियों की जांच शुरू कराई। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का आरोप है कि आयोग में अभ्यर्थियों की सीधे तौर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है और इसी वजह से आयोग अभ्यर्थियों के बीच अपनी विश्वसनीयता खो रहा है। ऐसे में आयोग की कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच होनी ही चाहिए।