कोविड के कारण 2020 में नहीं हुई थी परीक्षा
कोविड के कारण दिसंबर-2020 का आयोजन नहीं कराया जा सका था। इसे जून-2021 की यूजीसी नेट के साथ मर्ज कर दिया गया था। इस तरह दोनों परीक्षाओं को मिलाकर रजिस्ट्रेशन कराने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 12 लाख 66 हजार 509 हो गई थी। इनमें से छह लाख 71 हजार 288 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए।
यूजीसी ने जब 19 फरवरी को परिणाम जारी किया तो उसमें छह फीसदी अभ्यर्थियों को नेट और एक फीसदी अभ्यर्थियों को जेआरएफ के लिए सफल घोषित किया गया, जबकि दो परीक्षाओं को एक साथ मर्ज किए जाने के कारण नेट के लिए 12 फीसदी और यूजीसी के लिए दो फीसदी अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया जाना चाहिए था।
इससे अभ्यर्थियों में नाराजगी है। अलका पांडेय और तमाम अभ्यर्थियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर न्याय करने की मांग की है। अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर भी अभियान चला रखा है और न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि कोविड के कारण प्रतियोगी छात्र अपने भविष्य को लेकर संकट के दौर से गुजर रहे हैं। समिति पीड़ित छात्रों के संपर्क में है और जल्द ही न्यायालय का रुख करेगी।