इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पट्टे की भूमि पर बतौर किरायेदार काबिज व्यक्ति के जमीन को फ्रीहोल्ड कराने के अधिकार पर सरकार से जानकारी मांगी है। कोर्ट ने साथ ही विवादित भूमि को किसी के पक्ष में फ्रीहोल्ड करने पर रोक लगा दी है। मामला फर्रुखाबाद के फतेहगढ़ का है। किरायेदार पंकज राय द्वारा दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति मनोज मिश्र और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ सुनवाई कर रही है।
फतेहगढ़ के गाड़ी खाना में विवादित प्लाट संख्या 331 के बारे में याची का कहना है कि उसका नाम1983-84 में नगर पालिका के रजिस्टर पर किरायेदार के रूप में दर्ज है। उसने भी फ्रीहोल्ड अधिकार देने के लिए अर्जी दी। जिसे यह कहते हुए निरस्त कर दिया गया कि पट्टाधारक या वारिसों को ही फ्रीहोल्ड कराने का अधिकार है, किरायेदार को नहीं।
याचिका में इसे विधि विरूद्ध मानते हुए कहा गया कि दो दिसम्बर 92 के शासनादेश के खंड 2(2)में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नगर पालिका या महापालिका के किरायेदार को फ्रीहोल्ड कराने का अधिकार है। इसकी अनदेखी कर याची की अर्जी निरस्त की गई है।
सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि भूमि पर निर्माण ध्वस्त कर दिया गया। ऐसे में अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं है। जवाब दाखिल करने का समय मांगा गया। याची अधिवक्ता ने आपत्ति करते हुए कहा कि विवादित भूमि पर तीसरे पक्ष का हित न सृजित करने दिया जाए। इसपर कोर्ट ने किसी को भी अगली सुनवाई की तिथि तक फ्रीहोल्ड अधिकार देने पर रोक लगा दी है।