इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीएए-एनआरसी के विरोध में मंसूर अली पार्क में प्रदर्शन और धरना देने वालों पर दर्ज मुकदमे रद्द करने की मांग में दाखिल याचिका पर राज्य सरकार को एक माह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई तक याचीगण के विरुद्ध उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। एजाज अहमद और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की पीठ ने सुनवाई की।
याचीगण का कहना है कि वह लोग सीएए-एनआरसी के विरोध में मंसूर अली पार्क, प्रयागराज में शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन कर रहे थे। जिसमें याची सहित 26 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं जिसमें हत्या का प्रयास मारपीट, विधि विरुद्ध जमाव और सात क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट की धाराएं भी शामिल हैं, के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जबकि याची न तो मौके पर था और न ही याची व अन्य प्रदर्शनकारियों के पास से कोई आपत्तिजनक बरामदगी हुई है। प्राथमिकी रद्द करने की मांग की गई। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को एक माह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई तक याचीगण के खिलाफ किसी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है।