चंद्रशेखर आजाद पार्क परिसर में मौजूद इलाहाबाद संग्रहालय के सामने स्थिति गेट तोड़े जाने को लेकर हुए विवाद को हाईकोर्ट ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामूली मामले अधिकारियों को मिल बैठकर तय कर लेने चाहिए। अदालत ने कंपनी बाग सुंदरीकरण समिति के अध्यक्ष अपर महाधिवक्ता सीबी यादव और संग्रहालय के अधिवक्ता राधाकांत ओझा को आपस में बैठ में मामला तय कर लेने के लिए कहा है।
इलाहाबाद संग्रहालय और सुंदरीकरण समिति के अध्यक्ष ने इस मामले में अर्जी दाखिल कर सुनवाई की मांग की थी। दोनों ने अदालत से इस विवाद के निस्तारण की मांग की। चूंकि कंपनी बाग के सुंदरीकरण का कार्य हाईकोर्ट के निर्देश पर हो रहा है और कोर्ट मधु सिंह की जनहित याचिका के जरिए इसकी मॉनिटरिंग भी कर रही है, अर्जी को विचारार्थ स्वीकार कर लिया गया। मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि संग्रहालय के महत्व को कम नहीं समझा जा सकता है, इसलिए आपस में मिलकर सर्वमान्य हल निकाला जाए।
कोर्ट अपर महाधिवक्ता की इस दलील से सहमत थी कि तोड़ा गया गेट कंपनी बाग का है न कि संग्रहालय का। संग्रहालय कंपनी बाग परिसर में है और उसका अलग गेट है। सीबी यादव ने कोर्ट को बताया कि संग्रहालय के सामने का गेट बंद करके उससे 25 मीटर की दूरी पर मौजूद गेट का सुंदरीकरण किया जा रहा है। यही मूल गेट है जो सूबे की पहली विधान सभा बैठक के समय बनाया गया था। इस लिहाज से गेट ऐतिहासिक भी है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय कर्मियों का असली गुस्सा इस वजह से है कि उनके वाहन प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। सीबी यादव ने कर्मचारियों द्वारा की गई बदसलूकी की भी जानकारी कोर्ट को दी।
संग्रहालय का पक्ष रख रहे राधाकांत ओझा का कहना था कि गेट तोड़े जाने से संग्रहालय तक आम जनता को पहुंचने में दिक्कत होगी। संग्रहालय का ऐतिहासिक महत्व है और यह चार राष्ट्रीय संग्रहालयों में से एक है। उन्होंने गेट हटाए जाने का विरोध किया तथा संग्रहालय के अधिकार में दखल बताया। सरकार की ओर से बताया गया कि गेट हटाने के बाद जो बाउंड्री बनाई गई है, उसमें ग्रिल लगाई गई है, ताकि सड़क से भी दिखता रहे। कोर्ट ने इस मुद्दे को आपस में बैठक कर तय करने के लिए कहा है।
दोहरे की शुल्क की आपत्ति का निस्तारण करते हुए खंडपीठ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति संग्रहालय जाना चाहता है तो उसे पहले कंपनी बाग का टिकट खरीदना होगा। यदि वह वास्तव में संग्रहालय गया है तो उसका टिकट दिखाने पर कंपनी बाग के टिकट की कीमत लौटा दी जाए, इससे जनता दोहरा शुल्क देने से बच जाएगी।
इलाहाबाद (ब्यूरो)। संग्रहालय के सामने कंपनी बाग का गेट तोड़े जाने को लेकर कार्यवाहक निदेशक गौरव कृष्ण बंसल अपनी मर्यादाओं को लांघ गए। उन्होंने प्रकरण पर न सिर्फ चीफ जस्टिस को निजी तौर पर पत्र लिखा, बल्कि हाईकोर्ट के कई जजों से संपर्क साधकर मामले को निजी तौर पर प्रभावित करने की कोशिश की। चीफ जस्टिस ने उनकी इस हरकत पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि एक सीनियर आईआरएस अफसर द्वारा ऐसी हरकत शोभनीय नहीं है।
जब मामला न्यायालय में लंबित है तो उनको निजी तौर पर संपर्क करने या पत्र लिखने जैसी हरकत नहीं करनी चाहिए थी। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के 150वें स्थापना समारोह के दौरान प्रशासन और अन्य विभागों के तमाम अफसर उनके लगातार संपर्क में रहे क्योंकि समारोह में उनकी जरूरत थी। इसका अर्थ यह नहीं है कि उनको न्यायिक पक्ष में दखल देने या जजों से संपर्क करना चाहिए। दोनों ही मामले और भूमिकाएं अलग हैं। कोर्ट ने बंसल को आगाह किया है कि भविष्य में इस प्रकार की अशोभनीय हरकत से बाज आएं।