धन और हैसियत से न्याय में नरमी की धारणा खत्म होनी चाहिए
हाईकोर्ट ने आदेश में व्हाइट-कॉलर अपराधों की गंभीरता पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि कॉरपोरेट धोखाधड़ी, गबन और बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी से लोगों की पेंशन, बचत और आजीविका को भारी नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे अपराधों के मामले में केवल जुर्माना या ऐसी सजा पर्याप्त नहीं हो सकती जिसे कंपनियां कारोबार की लागत के रूप में वहन कर लें। कोर्ट ने कहा कि धन और सामाजिक हैसियत के कारण न्याय में किसी तरह की नरमी मिलने की धारणा को समाप्त किया जाना चाहिए। आर्थिक अपराधों के साथ भी कानून के तहत गंभीरता से निपटा जाना चाहिए।