आमतौर पर ब्रेन स्ट्रोक की वजह से मरीजों में लकवा की शिकायत सुनने को मिलती है, लेकिन स्ट्रोक की वजह से किडनी खराब हो जाए, ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता है। इसी विषय को लेकर मोती लाल नेहरू नेहरू मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में 120 लकवाग्रस्त मरीजों पर शोध किया गया।
शोध में पता चला है कि स्ट्रोक आने की वजह से मरीज में किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। इस प्रकार की समस्या बढ़ती उम्र के मरीजों और महिलाओं में अधिक देखने को मिली। शोध में 21 फीसदी महिलाएं और 10 फीसदी पुरुषों में ब्रेन स्ट्रोक का किडनी पर असर देखने को मिला।
सबसे बड़ी बात यह रही कि स्ट्रोक पड़ने से पहले इन मरीजों में बीपी और शुगर की शिकायत नहीं थी। यह शोध जल्द ही प्रकाशित होने के लिए भेजने की तैयारी है।
दिसंबर-2023 से दिसंबर-2024 तक मेडिसिन विभाग में 120 लकवा के मरीजों को शोध में शामिल किया गया। मरीज 18 वर्ष से अधिक उम्र के थे। इनमें 57 पुरुष व 63 महिलाएं शामिल थीं।
इन मरीजों की जीएफआर (ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट) और टीपीआर (ट्यूबलर रीएब्जॉर्पशन ऑफ फास्फेट) जांच कराई गई। शोध में दो तरह के ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को शामिल किया गया।
इसमें 52 फीसदी की नस दबने और 48 फीसदी की दिमाग की नस फटने के कारण ब्रेन स्ट्रोक का होना था। जांच में देखने को मिला कि मरीज को स्ट्रोक पड़ने की वजह से किडनी को मिलने वाली रक्त की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
किडनी को मिल रहा नमक और फ्लुएड का संतुलन भी गड़बड़ हुआ है। इसके अलावा न्यूरल मैकेनिज्म भी अनियंत्रित होने से किडनी पर प्रभाव पड़ा। वहीं, दिमाग की नस फटने से लकवाग्रस्त 17 फीसदी व 20 फीसदी नस दबने के कारण स्ट्रोक आने वाले मरीजों की किडनी प्रभावित पाई गई।
प्रोफेसर डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, प्रो. आनंद गुप्ता व रेजिडेंट डॉ. नवदीप ने शोध में पाया कि अगर ब्रेन स्ट्रोक के बाद मरीज के किडनी की जांच भी समय रहते करा ली जाए, तो किडनी खराब होने की समस्या से बचा जा सकता है।
-
जब ब्रेन स्ट्रोक होता है तो अधिकांश लकवा की समस्या देखने को मिलती है। इस दौरान लोग किडनी की जांच पर ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन स्ट्रोक आने पर किडनी पर प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है। ऐसे में स्ट्रोक के मरीजों को किडनी की जांच जरूर कराई चाहिए। - डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज