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Prayagraj News: व्यक्ति, समाज का दस्तावेज होती हैं किताबें

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बहुभाषा विकास केंद्र की पहल पर शनिवार को तीन पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इनमें डॉ.बीपी सागर का गज़ल संग्रह ‘गुनगुनाते अंदाज’, डॉ.कल्पना सागर का शोधग्रंथ ‘भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में प्रकृति उपमानों का सर्जनात्मक प्रयोग’ और राज हेमांशू सागर का गीत संग्रह ‘मेरी सोच मेरी आवाज’ शामिल रहा।
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बतौर मुख्य वक्ता इलाहाबाद संग्रहालय केडॉ.राजेश मिश्र ने कहा, किताबें आदमी को खोलती हैं, अगर बातें करो तो बोलती हैं। आज लोकार्पित किताबें भी अपने समय और समाज का दस्तावेज हैं। इनमें प्रकृति के उपमानों के सुंदर, सजीव चित्रण के साथ ही संवेदनाओं का अद्भुत संगम है। कवि डॉ.अमरनाथ सिंह ने कहा, इन पुस्तकों में मनोभावों की सजीव प्रस्तुति है।
विज्ञान परिषद सभागार में प्रधानमंत्री डॉ.शिवगोपाल मिश्र की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परिषद अध्यक्ष डॉ.हनुमान प्रसाद तिवारी थे। चंद्रभानु सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। संचालन बजरंगबली गिरि, स्वागत, संयोजन डॉ.एम.गोविंदराज जबकि डॉ.बीपी सागर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में डॉ.शांति चौधरी, अनिल श्रीवास्तव, अनुभव श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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