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नवरात्रि में व्रतियों की जेब पर मुनाफाखोरों का डाका

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black marketing in navaratra by shopkeepers - फोटो : CITY DESK
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वासंतिक नवरात्र में व्रत-अनुष्ठान में इस्तेमाल किए जाने वाले समान भी लॉकडाउन के बीच ऊंचे दाम पर बेचे जा रहे हैं। चाहे फल हों या सिंघाड़े और कुट्टू का आटा या फिर साबूदाना और सांवा के चावल, इनकी किल्लत बताकर कीमतें अधिक वसूली जा रही हैं। साथ ही पुराने पैकेट भी बाजार में खपाए जा रहे हैं।
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इस नवरात्र में आलू भी मुनाफाखोरी की भेंट चढ़ गया है। आम दिनों में 18 से 20 रुपये किलो तक मिलने वाला आलू अब फलाहार की खपत को देखते हुए 30 रुपये प्रति किलो तक बाजार में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। इसी तरह बाजार में कुट्टू और सिंघाड़े का आटा भी महंगे दर पर दिया जा रहा है। 100 से 120 रुपये प्रति किलो मिलने वाला कुट्टू का आटा 200 रुपये किलो तक बिक रहा है। इसी तरह सिंघाड़े का आटा 200 रुपये प्रति किलो की बजाए 280 रुपये किलो मिल रहा है। सूखा मेवा भी इसी तरह आसमान छूने लगा है। व्रत में इस्तेमाल होने वाला मखाना 175 से 200 रुपये एक पाव बाजार में मिल रहा है। इसी तरह फल और पूजा सामग्री भी तीन-चार गुना अधिक मूल्य पर बेची जा रही है।
अशोकनगर की गृहणी वैशाली सिंह बताती हैं कि कुट्टू और सिंघाड़े का आटा महंगा होने के साथ ही पुराने पैकेट में भी आ रहा है। उन्होंने बताया कि कुट्टू का आटा गूंथने के बाद इतना कड़ा हो जा रहा है कि उससे पूड़ियां नहीं बन पा रही हैं। पुराना होने की वजह से उसमें से गंध भी आती है। इसी तरह नेवादा कॉलेनी की डेजी और अर्पणा ने भी कुट्टू और सिंघाड़े के आटे की मनमानी कीमत वसूलने की शिकायत की। उन्होंने बताया कि नवरात्र में हमेशा 30 रुपये दर्जन मिलने वाला केला भी 60 से 60 रुपये दर्जन मिल रहा है। इससे व्रतियों की मुसीबतें बढ़ गई हैं।

black marketing in navaratra by shopkeepers- फोटो : CITY DESK

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