Mother brought in the court of Kalratri for fear relief
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मां ललिता देवी और मां कल्याणी देवी का कालरात्रि स्वरूप में हुआ शृंगार
प्रयागराज। एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता/ लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी। वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा/ वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी...। नवरात्रि की सप्तमी को इन मंत्रों के साथ मंगलवार को भयबाधा से निवारण के लिए मां कालरात्रि की सविधि आराधना की गई। इस दौरान घरों से लेकर मंदिरों तक मां कालरात्रि की उपासना की गई। मंदिरों में मां कालरात्रि की झांकियां सजाई गईं और शृंगार किया गया।
आदिशक्ति देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा के दौरान भक्तों ने मां से भय बाधा के निवारण की कामना की। मान्यता है कि कालरात्रि देवी की आराधना करने से दुष्टों का विनाश होता है। वीरता और साहस की स्वरूपा मां कालरात्रि का शृंगार वासंतिक नवरात्रि के सातवें दिन मीरापुर के मां कल्याणी देवी और मां ललिता देवी मंदिरों में भी किया गया। गुलाब, गेंदा व अन्य रंग-बिरंगे फूलों से मां कल्याणी देवी की नयनाभिराम झांकी सजाई गई। आचार्य श्यामजी पाठक के अनुसार अतय्चारियों के नाश के लिए आदिशक्ति ने कालरात्रि रूप धारण किया है।
इसी वजह से मां का नाम शुभंकरी भी है। ऐसी मान्यता है कि मां कालरात्रि की कृपा से भक्त भयमुक्त हो जाते हैं। इसी तरह ललिता देवी मंदिर में भी सुबह पांच बजे कालरात्रि स्वरूप में शृंगार किया गया। पुजारियों ने कोरोना महामारी से मुक्ति के लिए मां से अर्जी लगाई। इसी तरह घर-घर में में मां कलरात्रि की आराधना की गई और विश्वव्यापी कोरोना वायरस महामारी के नाश के लिए मां से प्रार्थना की गई।