भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) से जुड़े लोगों ने बृहस्पतिवार को मेरठ जाने वाली नौचंदी एक्सप्रेस में खूब हंगामा किया। यूनियन से जुड़े लोगों ने ट्रेन के जनरल कोच से लेकर सभी स्लीपर कोच में कब्जा कर लिया। जिसने भी उनका विरोध किया, उसे जबरन ट्रेन से बाहर उतार दिया गया। डेढ़ घंटे तक यूनियन से जुड़े लोग जंक्शन पर हंगामा करते रहे। हंगामे की सूचना जीआरपी और आरपीएफ को मिली तो काफी मशक्कत के बाद जवान कुछ कार्यकर्ताओं को उतारने में कामयाब हुए। इस बीच ट्रेन चली तो उसे दो बार चेन पुलिंग करके भी रोका गया। बाद में किसी तरह नौचंदी रात आठ बजे जंक्शन से मेरठ के लिए रवाना हो सकी।
दरअसल बृहस्पतिवार को भाकियू का माघ मेला क्षेत्र में एक कार्यक्रम था। उसमें भाग लेने के लिए सैकड़ों की संख्या में मेरठ, सहारनपुर, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, हापुड़, देवबंद, बिजनौर आदि स्थानों से यूनियन से जुड़ लोग इलाहाबाद पहुंचे थे। बहुत से यूनियन कार्यकर्ता मौनी अमावस्या से ही यहां अपना डेरा जमाए हुए थे। बृहस्पवितार को हुए किसान सम्मेलन के बाद वापसी भीड़ जंक्शन पहुंची तो मालूम पड़ा कि संगम एक्सप्रेस निरस्त है। मेरठ जाने वाली संगम एक्सप्रेस के निरस्त होने की सूचना मिलने के बाद सारी भीड़ प्लेटफार्म नंबर नौ-दस पर पहुंच गई। दरअसल मेरठ/सहारनपुर जाने वाली नौचंदी एक्सप्रेस जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर दस से चलती है। बृहस्पतिवार को ट्रेन एक घंटे की देरी से शाम 6.40 बजे रवाना होनी थी।
तय शुदा समय पर ट्रेन प्लेटफार्म पर जैसे ही यार्ड से पहुंची उसके सभी कोचों में भाकियू कार्यकर्ता घुस गए। एसी कोच को छोड़ दिया जाए तो ट्रेन के सभी कोचों में हरी-सफेद टोपी पहने भाकियू कार्यकर्ता ही नजर आए। इलाहाबाद से ट्रेन में काफी संख्या में लोगों का रिजर्वेशन था। यात्री जब अपनी आरक्षित सीट पर पहुंचे तो उन्हें वहां बैठने नहीं दिया गया। बहुत से यात्री भीड़ होने की वजह से स्लीपर कोचों में दाखिल भी नहीं हो पाए। यात्रियों ने इसकी शिकायत टिकट चेकिंग स्टाफ से की यूनियन से जुड़े लोगों की दबंगई के आगे कुछ भी न कर सके। सूचना आरपीएफ और जीआरपी को दी गई। काफी संख्या में फोर्स जब प्लेटफार्म पर पहुंची तो कार्यकर्ताओं को आरक्षित सीट खाली करने को कहा गया, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। हालांकि फोर्स ने बाद में कुछ कोचों से थोड़ूे बहुत कार्यकर्ताओं को उतारने में सफलता भी प्राप्त की।
इस बीच ट्रेन चली तो उसे चेन पुलिंग कर रोक लिया गया। यूनियन कार्यकर्ताओं की वजह से एस-9 एवं एस-10 के काफी यात्री प्लेटफार्म पर ही रह गए। मुरादाबाद जा रहे यात्री निशांत ने बताया कि उसका और उसके परिवार के तीन सदस्यों का रिजर्वेशन एस-9 कोच में था, लेकिन भाकियू कार्यकर्ताओं ने उसे कोच में घुसने तक नहीं दिया। परिजनों के साथ अभद्रता भी की। रात आठ बजे ट्रेन एक बार फिर चलने को हुई तो दुबारा चेन पुलिंग कर ली गई। बाद में ट्रेन दो मिनट बाद फिर रवाना हुई। उधर प्रयाग पहुंचने पर भी भाकियू कार्यकर्ताओं ने वहां से अधिकांश मुसाफिरों को ट्रेन मेें चढ़ने नहीं दिया। वहां भी नौचंदी दस मिनट तक रुकी। ‘जो भी हुआ बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। भाकियू द्वारा अगर पूर्व में अपने कार्यकर्ताओं की सूचना दी गई होती तो निश्चित ही रेलवे एक स्पेशल ट्रेन का इंतजाम उनके लिए कर देता।’
00 गौरव कृष्ण बंसल, सीपीआरओ, एनसीआर।