मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के गैस्ट्रोलॉजी विभाग में स्पाइग्लास और ईएचएल (इलेक्ट्रो हाइड्रोलिक लिथोट्रिप्सी प्रक्रिया) तकनीक की स्थापना व सफल उपयोग की शुरुआत की गई है। इस नई तकनीक से अब कॉमन बाइल डक्ट (सीबीडी) में मौजूद बड़ी से बड़ी पथरी को बिना चीरा लगाए निकाला जा सकेगा।
गैस्ट्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. एसपी मिश्रा और डॉ. संदीप प्रजापति के नेतृत्व में इस तकनीक का इस्तेमाल इसी महीने 55 वर्षीय मरीज पर किया गया। मरीज की सीबीडी में 2.5 सेमी की बड़ी पथरी को स्पाइग्लास तकनीक से छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर निकाला गया।
डॉ. एसपी मिश्रा ने बताया कि स्पाइग्लास और ईएचएल तकनीक के आने से अब मरीजों को बड़ी सर्जरी की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मरीज जिनके कॉमन बाइल डक्ट में बड़ी पथरी बन जाती है। उनकी पथरी को चीरा लगाए बिना निकाला जा सकेगा।
हर साल 10 हजार एंडोस्कोपी और 1200 से अधिक ईआरसीपी प्रक्रिया
मेडिकल कॉलेज के गैस्ट्रोलॉजी विभाग में हर साल 10 हजार से अधिक एंडोस्कोपी और 1200 से अधिक ईआरसीपी प्रक्रिया की जाती हैं। इनमें सीबीडी स्टोन के इलाज में सफलता दर 95 फीसदी से अधिक है। लिवर और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों के इलाज में नवीनतम तकनीकों का उपयोग किया जाता है। सामान्य मरीजों के साथ ही गंभीर रोगियों को भी न्यूनतम खर्च में बेहतरीन इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
वर्जन
गैस्ट्रोलॉजी विभाग की नई तकनीक से प्रयागराज समेत आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को लाभ मिलेगा। -डॉ. एसपी मिश्रा, अध्यक्ष, गैस्ट्रोलॉजी विभाग, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।