शासकीय अधिवक्ता ने कहा, हाईकोर्ट से 21 मार्च 23 को मुकदमा वापसी की अनुमति ली गई है। इसके बाद लोक अभियोजक ने स्वतंत्र निर्णय लिया और नियमानुसार अर्जी दाखिल की। मजिस्ट्रेट ने इस तथ्य और कानून की अनदेखी की है। इसलिए मजिस्ट्रेट का आदेश निरस्त किया जाय।
यह भी कहा कि सरकार किसी भी स्तर पर मुकदमा वापसी का फैसला ले सकती है। कोर्ट ने लोक अभियोजक के फैसले को विधि सम्मत माना और कहा, मजिस्ट्रेट का आदेश तथ्य तथा कानून के विपरीत होने के कारण अवैध है।