शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन शनिवार को भगवती के चंद्रघंटा स्वरूप का पूजन अर्चन किया गया। शक्तिपीठ अलोपशंकरी सहित शहर के सिद्धपीठों में श्रद्धालुओं का तांता लगा। दुर्गासप्तशती के मंत्रों से मंदिर परिसर गूंजते रहे। भगवती की कृपा पाने को बड़ी संख्या में महिलाएं भी जुटीं।
सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर में कोलकाता के सज्जाकारों ने त्रिपुर सुंदरी ललिता देवी का चंद्रघंटा स्वरूप में बहुरंगी फूलों से शृंगार किया। मंगला आरती के साथ पूजन का क्रम शुरू हुआ जो देर रात तक जारी रहा। देवी पूजन के बाद नवग्रह पूजन किया गया। शतचंडी यज्ञ में मानव कल्याण के निमित्त आहुतियां डाली गईं। मंदिर समिति अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा और महामंत्री धीरज नागर की देखरेख में सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं ने व्यवस्था संभाली। वहीं हाईकोर्ट हनुमान मंदिर के अष्टभुजी मंदिर, हनुमत निकेतन दुर्गा मंदिर, चौक गंगादास स्थित खेमामाई मंदिर, मुट्ठीगंज कालीबाड़ी, कर्नलगंज व कटरा कालीबाड़ी, चौफटका, समियामाई, सिद्धपीठ मां काली देवी मंदिर नयापुर करेली आदि में दुर्गा सप्तशती, शतचंडी के पाठ हुए।
कल्याणी देवी मंदिर में शृंगार दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। देवी का स्वर्ण, चांदी के आभूषणों और बहुरंगी फूलों से मनोहारी शृंगार देख लोग चकित होते रहे। मंदिर परिसर में मुंडन छेदन कराने के लिए तांता लगा रहा। अध्यक्ष सुशील पाठक ने देवी कल्याणी की महिमा बताई। व्यवस्थापक श्याम जी पाठक सहित मंदिर समिति के सदस्य एवं पदाधिकारी व्यवस्था में जुटे।
शक्तिपीठ अलोपशंकरी देवी मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी। देवी का दर्शन पाकर भक्त निहाल हुए भक्तों के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। मंदिर में बच्चों के मुंडन-छेदन कराने आए परिवारों ने देवी का भोग प्रसाद परिसर में तैयार किया। निशान चढ़ाने के लिए आसपास जिलों से बड़ी संख्या श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामसेवक गिरि की देखरेख में भोर से आरंभ हुआ पूजन-अर्चन का क्रम देर रात तक होता रहा।
सिविल लाइंस रोडवेज के सामने स्थित सिद्धेश्वरी गुप्तपीठ में विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई। पीठाधीश्वर आचार्य कुशमुनि के निर्देशन में मंदिर के दीक्षित साधकों ने देश की खुशहाली के लिए हवन किया। आचार्य कुशमुनि के मुताबिक श्रीलक्ष्मीनारायण सेवक मंडल के तत्वावधान में देश की अखंडता, खुशहाली एवं विश्व शांति की कामना से होने वाले हवन में देवी में नौ रूप के निमित्त नवमी तक हवन किया जाएगा। पूर्णाहुति दशहरा को होगी। व्यवस्था पूनम शुक्ला ने व्यवस्था संभाली।
अतरसुइया स्थित सिद्धपीठ शनिधाम में शनिवासरीय तृतीया पर शनि, शक्ति की उपासना की गई। पीठाधीश्वर पराग जी की देखरेख में जलाभिषेक, तैलाभिषेक, अष्टभुजी के पंचामृत स्नान के बाद दीपदान हुआ। शाम को माता मनसा, गायत्री और शनिदेव का फूलों से शृंगार किया गया। रात में अनेक दीपों से महाआरती उतारी गई। इस अवसर पर शनि परिवार सेवा समिति के सदस्य मौजूद थे।