उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई टीम को पूछताछ शुरू करने में ढाई माह का समय लगा गया। सीबीआई ने जांच की शुरुआत शून्य से की थी। टीम के पास सीमित सदस्य थे लेकिन ढाई माह तक टीम के सदस्य दिन-रात जांच में लगे रहे और अब सीबीआई को आयोग की कुछ बड़ी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के सुराग मिल चुके हैं। माना जा रहा है कि पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई और गिरफ्तारी शुरू की जा सकती है।
सीबीआई को कुल 583 भर्ती परीक्षाओं की जांच करनी हैं। इनमें 38 भर्तियां ऐसी हैं, जिनमें मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू हुए। पहले चरण में पीसीएस-2015, लोअर सबऑर्डिनेट 2013, आरओ/एआरओ 2014 और उपक्रीड़ाधिकारी पद पर हुई भर्ती परीक्षाओं की जांच हो रही है। इनमें प्राथमिकता पीसीएस-2015 की जांच को दी जा रही है। सीबीआई की टीम ने एसपी राजीव रंजन के नेतृत्व में ढाई माह पहले जांच शुरू की थी। राजीव रंजन के नेतृत्व में ही झारखंड लोक सेवा आयोग की भी जांच की गई थी लेकिन वहां विजिलेंस टीम पहले से जांच कर रही थी और सीबीआई जांच शुरू होते ही विजिलेंस ने तमाम सुबूत सीबीआई को सौंप दिए थे, सो वहां कार्रवाई भी पहले हो गई थी और आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य को जेल जाना पड़ा था।
यूपीपीएससी की भर्ती परीक्षाओं की जांच शुरू करने से पहले सीबीआई टीम को आयोग की पूरी प्रक्रिया को समझना पड़ा। इसके बाद आयोग कर प्रत्येक कंप्यूटर स्कैन किया गया। जांच टीम ने आयोग में 24-24 घंटे पड़ताल की। कैंप ऑफिस में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े लाखों पन्ने खंगाले गए। टीम के अफसरों को प्रदेश भर में अभ्यर्थियों से संपर्क साधना पड़ा। ढाई महीने तक चली मशक्कत के बाद सीबीआई को गड़बड़ी के सुबूत मिलने शुरू हो गए और अब नौबत पूछताछ तक पहुंच गई है। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ की प्रक्रिया भी लंबी चल सकती है। पूछताछ के बाद सुबूतों को पुष्ट किया जाएगा और इसके बाद मुकदमा दर्ज कराने एवं गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सीबीआई टीम ने जांच की शुरुआत में तकरीबन दस दिनों तक आयोग के कंप्यूटरों को स्कैन किया। इनमें गोपनीय विभाग से लेकर अध्यक्ष एवं सदस्यों तक के कंप्यूटरों को स्कैन किया गया। इसके बाद टीम ने आयोग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से समझा। टीम ने यूपीपीएससी से परीक्षाओं से संबंधित मूल दस्तावेज भी मांगे। पहले तो यूपीपीएससी ने दस्तावेज देने से ही इनकार कर दिया लेकिन मामला शासन स्तर तक पहुंचा और शासन के हस्तक्षेप के बाद आयोग दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए तैयार हुआ। कुछ परीक्षाओं के मूल दस्तावेज और कुछ की फोटो कॉपियां दी गईं। लाखों पन्ने फोटो कॉपी होने में कई दिन बीत गए। सीबीआई ने मॉडरेशन में गड़बड़ी पकड़ी लेकिन जब आयोग से मॉडरेटर का नाम पूछा तो गोपनीयता के नाम पर आयोग नाम बताने को तैयार नहीं हुई। आयोग और सीबीआई के बीच खींचतान की स्थिति बनी रही और इन सबके बीच सीबीआई की टीम जांच में जुटी रही।