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Prayagraj: बीबीए-एमबीए के छात्र पढ़ेंगे टाटा की सफलता की कहानी, इविवि के पाठ्यक्रम में कई औद्योगिक घराने शामिल

Fri, 11 Oct 2024 12:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

पांच वर्षीय बीबीए-एमबीए पाठ्यक्रम की समन्वयक डॉ.शेफाली आनंद बताती हैं कि कुलपति प्रो.संगीता श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में नई शिक्षा नीति के तहत यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। सत्र 2023-24 से पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।
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रतन टाटा सफलता के मंत्र - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के मोतीलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (मोनिरबा) में संचालित पांच वर्षीय इंटीग्रटेड पाठ्यक्रम बीबीए-एमबीए के छात्र रतन टाटा की सफलता की कहानी भी पढ़ेंगे।

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पिछले सत्र 2023-24 से शुरू हुए इस पाठ्यक्रम में जेआरडी टाटा, धीरूभाई अंबानी, अजीम प्रेमजी, नारायण मूर्ति समेत देश के कई प्रमुख उद्योगपति शामिल हैं। अब इनमें एक नाम रतन टाटा का भी शामिल होगा। हालांकि, मौजूदा पाठ्यक्रम में भी जब औद्योगिक घरानों का जिक्र आता है तो विद्यार्थियाें को रतन टाटा जैसे बिजनेस लीडर का उदाहरण दिया जाता है और खासतौर पर एथिकल बिजनेस में, जिसमें उन्होंने अलग मुकाम हासिल किया।

पांच वर्षीय बीबीए-एमबीए पाठ्यक्रम की समन्वयक डॉ.शेफाली आनंद बताती हैं कि कुलपति प्रो.संगीता श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में नई शिक्षा नीति के तहत यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। सत्र 2023-24 से पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। इसमें 40 सीटें निर्धारित की गई हैं। मौजूदा सत्र 2024-25 के तहत दूसरे बैच के लिए प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। डॉ.शेफाली के अनुसार पाठ्यक्रम में एक पेपर ऑर्गनाइजेशनल बिहेवियर का होता है। इसमें लीडरशिप के बारे में पढ़ाया जाता है। जब बिजनेस लीडर के बारे में पढ़ाते हैं तो रतन टाटा का नाम भी आता है।

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छात्र-छात्राओं को रतन टाटा जैसे उद्योगपतियों का उदाहरण देते हुए बताया जाता है कि बिजनेस लीडर बनने के लिए क्या गुण होने चाहिए। डॉ.शेफाली ने बताया कि आगे चलकर पाठ्यक्रम में रतन टाटा के एथिकल बिजनेस से जुड़े सिद्धांतों को भी शामिल किया जाएगा, जिसने समाज को एक नई दिशा दी और बताया कि बिजनेस समाजसेवा का भी सशक्त माध्यम हो सकता है। डॉ.शेफाली इविवि के इंक्यूबेशन सेंटर की भी समन्वयक हैं। उनका कहना है कि सेंटर में होने वाली कार्यशालाओं और कार्यक्रमों में भी रतन टाटा जैसे उद्योगपतियों का उदाहरण देते हुए छात्रों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है।
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