बैंक से लोन लेने के दौरान छोटी सी चूक कई लोगों भारी पड़ गई है। करार से संबंधित दस्तावेजों केसाथ लगाने के लिए बैंक के नाम पर स्टांप लेने वालों को अब भुगतान नहीं हो पा रहा है। इस तरह के ज्यादा मामले सामने आने के बाद निबंधन कार्यालय की ओर से आश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही ग्राहकों को जागरूक करने की योजना बनाई गई है कि लोग अपने नाम पर स्टांप लें।
लोन लेने पर बैंक के साथ होने वाले करार से संबंधित दस्तावेजों के साथ स्टांप भी लगाना होता है। स्टांप पेपर कर्ज ली गई राशि के 0.50 प्रतिशत या अधिकतम 10 हजार रुपये के होते हैं। कई बार बैंक अपने नाम पर स्टांप मंगा लेते हैं। यह नियम विरूद्ध तो नहीं है लेकिन किन्हीं कारणों से लोन नहीं लेने या अस्वीकार होने पर स्टांप शुल्क की राशि फंस जाती है।
विगत तीन महीनों में ऐसे करीब एक दर्जन मामले आए हैं, जिनका भुगतान रोक दिया गया है। चूंकि अब ई-स्टांप लिए जाते हैं। ऐसे में लोन निरस्त होने पर स्टांप की राशि संबंधित के खाते में ट्रांसफर की जाती है। ऐसे में जिन लोगों ने बैंक के नाम पर स्टांप लिया है उनके भुगतान रोक दिए गए हैं। ऐसे ज्यादा मामले सामने आने के बाद निबंधन कार्यालय की तरफ़ से स्टांप विक्रेताओं को निर्देश दिया गया है कि आवेदक के नाम पर ही स्टांप जारी करें।
बैंक प्रबंधकों को भी इस बाबत निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लोगों को जागरूक करने की योजना बनाई गई है। एआईजी स्टांप पीएन सिंह का कहना है कि ऐसे मामले आए हैं। बैंक के नाम पर स्टांप होने के कारण उन्हें भुगतान नहीं हो पा रहा। इस स्थिति से निपटने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
अधिक मूल्य के स्टांप मंगाने की भी आशंका
बैंकों के नाम पर स्टांप लिए जाने पर ठगी का शिकार होने की भी आशंका रहती है। एक वरिष्ठ अफसर का कहना है कि बैंक के अधिकारी कई बार अधिक मूल्य का स्टांप मंगा लेते हैं। उसका इस्तेमाल वे अपनी जरूरत के अनुसार कहीं और कर लेते हैं। लोन लेने वाले अपने नाम पर स्टांप लें तो इससे भी बचा जा सकता है।