इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर, बांसगांव नगर पंचायत अध्यक्ष के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार छीनने के जिलाधिकारी के आदेश पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी। इससे पूर्व कोर्ट ने जिलाधिकारी से इस मामले की जानकारी मांगी थी। उनकी ओर से पेश किए गए हलफनामे में सही जानकारी नहीं दी गई थी। इस कोर्ट ने जिलाधिकारी को नए सिरे से हलफनामा दाखिल करने का निदेश्स दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति साधना रानी ठाकुर की खंडपीठ ने नगर पंचायत अध्यक्ष वेद प्रकाश शाही की याचिका पर दिया है। याची का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि याची के खिलाफ वाहन खरीद में एक करोड़,तीस लाख,अट्ठारह हजार 450रूपये के घोटाले का आरोप लगा।
राज्य सरकार ने कमिश्नर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। जिसने 7नवंबर 20को प्रारंभिक रिपोर्ट दी।
याची का कहना था कि जांच के दौरान उसे न तो नोटिस दिया गया और न ही उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।10मार्च 20को कारण बताओ नोटिस जारी कर अधिकार छीन लिए गए। इस पर कोर्ट ने जिलाधिकारी से जानकारी मांगी। किन्तु मांगी गई जानकारी नहीं दी गई।जिसके कारण कोर्ट ने याची को अंतरिम राहत देते हुए जवाब मांगा है।