आवेदक शोएब की पहली जमानत याचिका जनवरी में उच्च न्यायालय ने इस आधार पर खारिज कर दी थी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक की मौत गर्दन के शरीर से अलग होने के कारण हुई थी। याची ने इस आधार पर दूसरी जमानत याचिका दायर की कि सह-आरोपी एजाज अहमद (पीड़िता के पति) को अक्तूबर 2023 में जमानत मिल गई।
अपर शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि सह-अभियुक्त एजाज ने जनवरी 2023 के आदेश को छिपाकर जमानत प्राप्त की थी जिसमें अख्तर की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। अपराध जघन्य प्रकृति का है, इसलिए अपराध की गंभीरता को देखते हुए आवेदक की जमानत अर्जी खारिज किए जाने योग्य है।
कोर्ट ने पक्षों के वकीलों को सुनने और मामले की समग्रता में जांच करने के बाद आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। वहीं, कोर्ट ने सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई की तारीख पर अभियोजन पक्ष के सभी शेष गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करें। ट्रायल कोर्ट को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह मुकदमे को शीघ्रता से पूरा करें, किसी भी पक्ष को कोई स्थगन न दें।