प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में अभियुक्त की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। साथ ही उस पर कई प्रतिबंध भी लगाए हैं। कोर्ट ने कहा है कि अभियुक्त मामले से जुड़े साक्ष्य में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करेगा और न ही गवाहों को धमकी एवं प्रताड़ित करेगा।
याची सदानंद सहित तीन लोगों पर शाहजहांपुर जिले पुवाया थाने में 31 अगस्त 2019 में आईपीसी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। याची पर पैसा लेकर फर्जी लाइसेंस बनाने का आरोप है। याची के अधिवक्ता का तर्क था कि याची की ओर से किसी तरह के अपराध को स्वीकार नहीं किया गया है लेकिन पुलिस ने गलत कराई की है। याची के खिलाफ ऐसा कोई साक्ष्य भी नहीं है। सहआरोपियों के इस बयान कि याची ने शस्त्र लाइसेंस बनवाने के लिए तीस हजार रुपये लिए हैं, इसको आधार बनाकर पुलिस ने याची को जेल भेज दिया। याची ग्राम प्रधान है और उसेराजनीतिक द्वेष वश दोबारा फंसाया गया है। याची पर पहले भी धोखाधड़ी के मामले में गाजियाबाद जिले के कवि नगर थाने में एफआईआर दर्ज है। हालांकि सरकारी अधिवक्ता सतीश कुमार सिंह ने जमानत अर्जी मंजूर करने का विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।