असद की मदद के लिए करीबियों को सौंपे थे काम
फरारी के दौरान अतीक को वित्तीय मदद करने के लिए उसने अपने पुराने संबंधों का इस्तेमाल किया। कोलकाता, दिल्ली से लेकर बिहार और कानपुर तक उसने लोगों को उसकी मदद के लिए लगाया था। असद की शहरों में छुप रहा था और कुछ दिन रुकने के बाद ठिकाना बदल देता था। दिल्ली में भी वह करीब 15 दिन रुका था। इसके बाद एसटीएफ के आने की भनक लगने पर वह भाग निकला था। दिल्ली और मेरठ में उसकी मदद करने वालों को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया था।
गुलाम के साथ ही असद बदल रहा था ठिकाने
उमेश पाल की हत्या के बाद असद गुलाम हसन के साथ ही निकला था और अंत समय तक दोनों एक साथ ही रहे। वह जहां भी जा रहा था गुलाम को अपने साथ लिए हुए थे। गुड्डू मुस्लिम व अन्य शूटर कानपुर जाने के बाद दूसरे शहरों की ओर निकल गए लेकिन असद और गुलाम एक साथ ही रहे। झांसी में एक साथ दोनों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया।