फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Prayagraj: अतीक ने उमेश ही नहीं चार अन्य गवाहों को भी किया था अगवा, राजू पाल हत्याकांड केस के चश्मदीद थे चारों

Sun, 26 Mar 2023 08:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बाहुबली माफिया अतीक अहमद को साबरमती जेल से यूपी लाए जाने को लेकर भले ही उमेश पाल अपहरण कांड बेहद चर्चा में है। लेकिन उमेश राजू पाल हत्याकांड का वह इकलौता गवाह नहीं था जो माफिया और उसके गुर्गों के जुल्म का शिकार हुआ।
विज्ञापन
Prayagraj News : माफिया अतीक अहमद और उमेश पाल। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बाहुबली माफिया अतीक अहमद को साबरमती जेल से यूपी लाए जाने को लेकर भले ही उमेश पाल अपहरण कांड बेहद चर्चा में है। लेकिन उमेश राजू पाल हत्याकांड का वह इकलौता गवाह नहीं था जो माफिया और उसके गुर्गों के जुल्म का शिकार हुआ। उसके अलावा चार अन्य गवाह भी थे, जिन्हें न सिर्फ अगवा किया गया बल्कि प्रताड़ित कर बयान बदलवाने का भी आरोप अतीक एंड कंपनी पर लगा। हालांकि इन चार मुकदमों में से सबूतों के अभाव में दो मामला में सभी आरोपी बरी हो गए थे।

विज्ञापन









राजू पाल हत्याकांड में जमानत पर रिहा होने के बाद अतीक और उसके गुर्गों ने गवाहों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था। इसके तहत न सिर्फ उन्हें डराया धमकाया गया बल्कि अगवा कर प्रताड़ित भी किया गया। मारा-पीटा गया, परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई और असलहों के दम पर बयान बदलने के लिए मजबूर भी किया गया।

गवाहों की शिकायत पर नहीं हुई कोई कार्रवाई
राजू पाल हत्याकांड के बाद ऐसी पांच घटनाएं हुईं। अतीक एंड कंपनी के शिकार हुए गवाहों ने इसकी शिकायत भी की लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। हालातों को देखते हुए वह चुप होकर बैठ गए। 2007 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर मायावती काबिज हुईं, तब जाकर यह मामले सामने आए। इसके बाद पीड़ितों की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गईं।

इन पांच मामलों में से तीन घटनाएं धूमनगंज थाना क्षेत्र की थीं। इनमें से एक में उमेश पाल वादी थे। यह वही मामला है जिसमें 28 मार्च को अतीक अहमद और अन्य आरोपियों को सजा सुनाई जानी है। इसके अलावा एक मामला धूमनगंज थाने में ही सैफुल्ला की ओर से दर्ज कराया गया था। इसमें अतीक के अलावा उसके भाई अशरफ और अन्य को आरोपी बनाया गया था।

बयान बदलने के लिए मजबूर हो गए थे गवाह

पीड़ित का आरोप था कि 21 फरवरी 2006 को आरोपियों ने उसे अगवा कर लिया और फिर इतना प्रताड़ित किया कि वह उनके पक्ष में बयान देने को मजबूर हो गया। इसी तरह राजू पाल हत्याकांड के ही एक अन्य गवाह महेंद्र पटेल उर्फ बुद्धि लाल पुत्र मंगला प्रसाद को भी अतीक एंड कंपनी ने अगवा किया और प्रताड़ित कर बयान अपने पक्ष में दिलवाया। राजू पाल हत्याकांड से संबंधित गवाहों के अपहरण के दो अन्य मामले भी सामने आए।

यह घटनाएं कीडगंज और करेली थाना क्षेत्र की थीं जिसमें संबंधित थानों में एफआईआर भी दर्ज कराई गई। करेली में बख्शीमोढ़ा निवासी मोहम्मद सादिक ने अतीक अहमद समेत 15 लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें अपहरण के साथ ही बलवा लूट समेत कुल 11 धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।

विज्ञापन

इसी तरह राजू पाल हत्याकांड के ही एक गवाह ने कीडगंज में अपने अपहरण के आरोप में अतीक और उसके सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। खास बात यह है कि पुलिस एफआईआर दर्ज होने के बावजूद दो मामलों में सबूत नहीं जुटा सकी। इनमें से एक मामला करेली थाना क्षेत्र का था जबकि दूसरा मामला धूमनगंज थाने से संबंधित था। जिसके चलते इन दोनों मामलों में सबूतों के अभाव में आरोपी बरी कर दिए गए।

दो थानाध्यक्ष भी बनाए गए थे आरोपी

राजू पाल हत्याकांड के गवाह सादिक के अपहरण में करेली थाने में जो एफआईआर दर्ज हुई उसमें करेली के दो थानाध्यक्ष भी आरोपी बनाए गए थे। इनमें से एक घटना के समय करेली थाने के प्रभारी रहे राजेश सिंह थे जबकि पूर्व प्रभारी अब्दुल सत्तार को भी आरोपी बनाया गया था। हालांकि बाद में 2016 में सबूतों के अभाव में अन्य आरोपियों के साथ उन्हें भी बरी कर दिया गया था।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें