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अतीक-अशरफ हत्याकांड : अतीक की बर्बादी में बुंदेलखंड की धरती का गजब इत्तेफाक, दो आरोपी बुंदेलखंड के

Sun, 16 Apr 2023 01:59 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बुंदेलखंड की धरती ने माफिया अतीक अहमद की बर्बादी में बड़ी भूमिका निभाई। उस पर और उसके भाई अशरफ पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने वाले तीन हमलावरों में से दो बुंदेलखंड इलाके के हैं।
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Prayagraj News : अतीक और अशरफ की हत्या के बाद मौके पर छानबीन करती फॉरेंसिक टीम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बुंदेलखंड की धरती ने माफिया अतीक अहमद की बर्बादी में बड़ी भूमिका निभाई। उस पर और उसके भाई अशरफ पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने वाले तीन हमलावरों में से दो बुंदेलखंड इलाके के हैं। गजब का इत्तफाक है कि दो दिन पहले उसका बेटा असद और शूटर गुलाम बुंदेलखंड के ही झांसी में पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए।

पुलिस अभिरक्षा में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए काल्विन अस्पताल ले जाए जा रहे माफिया भाई अतीक और अशरफ पर तीन युवकों ने अचानक गोलियां बरसानी शुरू कर दी थी। जिन हमलावर युवकों ने गोलीबारी की, पुलिस ने उनको दबोच लिया। जब उनके बारे में जानकारी जुटाई जाने लगी तो पता चला कि दो हमलावर बुंदेलखंड क्षेत्र के रहने वाले हैं। इनमें लवलेश तिवारी बांदा का रहने वाला है जबकि अरुण मौर्य हमीरपुर का निवासी है।

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तीसरा आरोपी सनी कासगंज जनपद से है। इत्तफाक की बात है कि बीती 13 अप्रैल को उसके फरार बेटे असद और खास गुर्गे गुलाम की मुठभेड़ भी बुंदेलखंड के झांसी जिले में हुई। इस दौरान पुलिस ने दोनों को मौत के घाट उतार दिया। ये दोनों उमेश पाल हत्याकांड के बाद से पुलिस को लगातार चकमा देते हुए अनेक शहरों को ठिकाना बनाते रहे, लेकिन झांसी की धरती इन दोनों के लिए जानलेवा साबित हुई।

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Prayagraj News : अतीक और अशरफ की हत्या के बाद मौके पर छानबीन करती फॉरेंसिक टीम। - फोटो : अमर उजाला।

छावनी में तब्दील हुआ काॅल्विन अस्पताल, दुस्साहसिक वारदात ने दहलाया

दुस्साहसिक वारदात के बाद शनिवार की रात मोती लाल नेहरू काॅल्विन अस्पताल छावनी में तब्दील हो गया। अस्पताल के गेट को बंद कर दिया गया। पुलिस ने घटना स्थल की बैरिकेडिंग कर दी। हर तरफ दहशत और खौफ के माहौल बन गया। इस घटना के बाद कोई गोलियों का खोखा गिनता रहा तो कोई हमलावरों के दुस्साहस पर दंग रह गया।

धूमनगंज पुलिस की सुरक्षा घेरे को भेदते हुए मीडियाकर्मियों के बीच बदमाशों ने अतीक और अशरफ को गोलियों से जिस कदर भूना उससे लोग हिल गए। अस्पताल की इमरजेंसी के गेट पर अंधाधुंध फायरिंग से लोग सकते में आ गए। लहूलुहान अतीक और अशरफ को लेकर पुलिस वाले स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल भागे। इसके बाद सबसे पहले शाहगंज पुलिस वहां पहुंची।

कुछ ही देर में सिविल लाइंस पुलिस आ गई। इसके बाद डीसीपी सत्येंद्र नाथ तिवारी भी पहुंच गए। कुछ ही देर में पुलिस और आरएएफ के जवानों को चप्पे -चप्पे पर तैनात कर दिया गया। काॅल्विन अस्पताल परिसर देखते-देखते छावनी में तब्दील हो गया। अस्पताल गेट से 30 मीटर पहले ही बैरिकेडिंग कर दी गई। अस्पताल रोड पर वाहनों की आवाजाही रोकी जाने लगी। बाइक सवारों को भी दूसरे रास्तों से डायवर्ट किया जाने लगा। हर तरफ हूटरों के शोर गूंजने लगे। 

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