रास्ते में उसकी हत्या भी हो सकती है। उसने कहा कि उसे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद यहां भेजा गया है। उसे प्रयागराज से आई पुलिस टीम पर कोई भरोसा नहीं है। वह अपने वकीलों के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल करना चाहता है। जेल अधिकारियों और पुलिस टीम ने अतीक अहमद को समझाने का प्रयास किया कि अदालत का वारंट है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। लेकिन, अतीक अहमद नहीं मान रहा था।
उसने कहा कि वह इतनी दूर सड़क मार्ग से नहीं जा सकता। उसने अपनी तमाम बीमारियों के बारे में जेल अधिकारियों और पुलिस टीम को बताया। जेल अधिकारियों ने तुरंत डॉक्टरों की टीम बुलाकर अतीक अहमद का मेडिकल चेकअप कराया। टीम में जब ओके कर दिया तब अतीक को जेल से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
सिर पर सफेद पगड़ी और काला कुर्ता पहने अतीक बाहर निकला तो उसका चेहरा उतरा हुआ था। चेहरे से साफ तौर पर वह हैरान और परेशान लग रहा था। बाहर निकल कर उसने बस इतना ही कहा कि यह मेरे हत्या की साजिश है।