लेडी पुलिस ने महिलाओं की तलाशी लेकर शाइस्ता की पहचान की कोशिश की। हालांकि पुलिस को सफलता नहीं मिली। इसके अलावा राजरूपपुर और बम्हरौली इलाकों में भी शाइस्ता की तलाश की गई। कसारी मसारी में स्थित शाइस्ता के मायके वाले अपना घर खुला छोड़कर भाग निकले। बाहरी गेट खुला हुआ था। अंदर के सारे कमरे खुले हुए थे। अंदर आलमारी और बक्सों को ढंग से खंगाला गया था। सारे कमरों में चीजें जमीन पर बिखरी थी। बरामदे में एक खुली तलवार भी पड़ी थी। बगल में उसकी म्यान रखी थी।
मंगलवार की सुबह जब लोगों ने देखा हैरत में पड़ गए। जानकारी होने पर मीडियाकर्मी भी शाइस्ता के घर पहुंच गए थे। पुलिस अधिकारियों ने भी इस बात पर चुप्पी साध रखी है कि शाइस्ता के मायके वाले घर खुला छोड़कर क्यों चले गए। इसे लेकर तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त थीं। कयास लगाए जा रहे थे कि कहीं कोई बड़ी बात की जानकारी होने पर घर वाले आनन फानन में चले गए।
रात में पुलिस ने चलाया था सर्च ऑपरेशन, घर की ली थी तलाशी
शाइस्ता के मायके में उसके पिता हारुन रहते हैं। हारुन पुलिस विभाग के रिटायर्ड एचसीपी हैं। शाइस्ता के दो भाइयों में से एक जकी अहमद मोहित जायसवाल अपहरणकांड में जेल में है। दूसरा भाई शबी अहमद अध्यापक है। दोनों भाइयों के परिवार वाले यहीं रहते हैं। कसारी मसारी में रहने वाले एक शख्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अतीक अहमद और अशरफ की अंत्येष्टि के बाद घर वाले ताला लगाकर चले गए थे। सोमवार की रात पुलिस ने हारुन के घर की तलाशी ली थी। इसके बाद से ही पूरा घर खुला हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि हारुन की तबीयत बहुत ज्यादा खराब चल रही है। उन्हें किसी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।