परियोजना के लिए संपूर्ण लागत 55416.71 लाख स्वीकृत की गई थी। यह पाया गया कि राजेन्द्र प्रसाद सिंह परियोजना प्रबंधक, रा0नि0नि0 व पी0एन0 सिंह अपर परियोजना प्रबंधक, रा०नि०नि० ने सम्पूर्ण स्वीकृत लागत 55416.71 लाख का कार्य टेंडर के माध्यम से नहीं कराया। मात्र 334.38 करोड़ का अनुबंध किया गया। इससे पूर्व 27 करोड़ का सिविल कार्य बिना टेंडर के नियम विरुद्ध तरीके से कराया जाना पाया गया।
डाॅ. शिव प्रकाश ने नोडल अधिकारी नामित किए जाने के बावजूद भी कुशल पर्यवेक्षण न करते हुए वास्तविक वस्तुस्थिति से महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, लखनऊ को लिखित रूप में अवगत नहीं कराया। आरोप है कि कार्य की प्रगति जानबूझकर धीमी रखी गई ताकि अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके।
इसके अलावा मनोज कुमार, तत्कालीन अपर परियोजना प्रबन्धक, रा०नि०नि० विद्युत इकाई वाराणसी व ज्ञान प्रकाश, तत्कालीन लेखाकार, रा०नि०नि० विदयुत इकाई वाराणसी विद्युत सम्बंधी कार्य को अनियमित तरीके से कराते हुए बिना निविदा, बिना अनुबंध के 23.45 करोड़ का इलेक्ट्रिक कार्य बिना टेंडर नियमविरुद्ध तरीके से शासनादेश की अवहेलना करते हुए कराया जाना पाया गया।
इसके अलावा मो. इन्तिखाब आलम, प्रबन्धक मे0 टाटा प्राजेक्ट लि0 जौनपुर को राजकीय निर्माण निगम व नोडल/ पर्यवेक्षण अधिकारी से मिलीभगत कर लाभ की प्रत्याशा में जानबूझकर कार्य की प्रगति धीमी रखते हुए समयबद्ध कार्य न कराया जाना पाया गया। उपरोक्त सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।