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प्रयागराज : मेडिकल कॉलेज के एसो. प्रोफेसर समेत छह भ्रष्टाचार में नामजद, विजिलेंस ने दर्ज किया केस

Sat, 22 Jul 2023 01:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह मेडिकल काॅलेज जौनपुर से सात किलोमीटर दूर शाहगंज मार्ग पर ग्राम सिद्दीकपुर में बनाया जाना था। प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा अनुभाग की ओर से डाॅ. शिव प्रकाश, एसो. प्रोफेसर, एस०पी०एम० विभाग, मेडिकल कालेज इलाहाबाद को नोडल अधिकारी नामित किया गया।
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विस्तार
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मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एसो. प्रोफेसर डॉ. शिवप्रकाश समेत छह पर भ्रष्टाचार के आरोप में केस दर्ज हुआ है। मामला जौनपुर में मेडिकल कॉलेज के निर्माण में अनियमितता के आरोपों से संबंधित है। अन्य आरोपियों में राजकीय निर्माण निगम के दो अफसर व दो कर्मचारी भी शामिल हैं।

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रिपोर्ट विजिलेंस प्रयागराज सेक्टर में तैनात इंस्पेक्टर हवलदार सिंह यादव की तहरीर पर दर्ज की गई है। उन्होंने तहरीर में बताया है कि फरवरी 2022 में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय जौनपुर का निर्माण कार्य समय से पूर्ण न किए जाने व निर्माण कार्य की गति धीमी रखने के फलस्वरूप प्रायोजना की लागत में वृद्धि कर अनुचित लाभ प्राप्त करने के संबंध में खुली जांच के आदेश दिए गए थे। इसमें पाया गया कि 2012-13 में शासन ने जनपद जौनपुर में स्वशासी राजकीय मेडिकल कालेज की स्थापना का निर्णय लिया गया।

यह मेडिकल काॅलेज जौनपुर से सात किलोमीटर दूर शाहगंज मार्ग पर ग्राम सिद्दीकपुर में बनाया जाना था। प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा अनुभाग की ओर से डाॅ. शिव प्रकाश, एसो. प्रोफेसर, एस०पी०एम० विभाग, मेडिकल कालेज इलाहाबाद को नोडल अधिकारी नामित किया गया। जबकि निर्माण के लिए उ0प्र0 राजकीय निर्माण निगम लि0 को कार्यदायी संस्था नामित किया गया।

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परियोजना के लिए संपूर्ण लागत 55416.71 लाख स्वीकृत की गई थी। यह पाया गया कि राजेन्द्र प्रसाद सिंह परियोजना प्रबंधक, रा0नि0नि0 व पी0एन0 सिंह अपर परियोजना प्रबंधक, रा०नि०नि० ने सम्पूर्ण स्वीकृत लागत 55416.71 लाख का कार्य टेंडर के माध्यम से नहीं कराया। मात्र 334.38 करोड़ का अनुबंध किया गया। इससे पूर्व 27 करोड़ का सिविल कार्य बिना टेंडर के नियम विरुद्ध तरीके से कराया जाना पाया गया।
 
डाॅ. शिव प्रकाश ने नोडल अधिकारी नामित किए जाने के बावजूद भी कुशल पर्यवेक्षण न करते हुए वास्तविक वस्तुस्थिति से महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, लखनऊ को लिखित रूप में अवगत नहीं कराया। आरोप है कि कार्य की प्रगति जानबूझकर धीमी रखी गई ताकि अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके।
 
इसके अलावा मनोज कुमार, तत्कालीन अपर परियोजना प्रबन्धक, रा०नि०नि० विद्युत इकाई वाराणसी व ज्ञान प्रकाश, तत्कालीन लेखाकार, रा०नि०नि० विदयुत इकाई वाराणसी विद्युत सम्बंधी कार्य को अनियमित तरीके से कराते हुए बिना निविदा, बिना अनुबंध के 23.45 करोड़ का इलेक्ट्रिक कार्य बिना टेंडर नियमविरुद्ध तरीके से शासनादेश की अवहेलना करते हुए कराया जाना पाया गया।

इसके अलावा मो. इन्तिखाब आलम, प्रबन्धक मे0 टाटा प्राजेक्ट लि0 जौनपुर को राजकीय निर्माण निगम व नोडल/ पर्यवेक्षण अधिकारी से मिलीभगत कर लाभ की प्रत्याशा में जानबूझकर कार्य की प्रगति धीमी रखते हुए समयबद्ध कार्य न कराया जाना पाया गया। उपरोक्त सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।
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