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Asad Encounter: असद के एनकाउंटर से लोग नाराज, पड़ोसियों ने कहा- उसकी कच्ची थी उम्र, पेशेवर अपराधी भी नहीं था

Sat, 15 Apr 2023 10:24 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

माफिया अतीक के बेटे असद के एनकाउंटर से लोग नाराज हैं। लोगों का कहना है कि पुलिस को नहीं कोर्ट पर फैसला छोड़ना चाहिए था। पड़ोसियों ने कहा कि असद की उम्र कच्ची थी। पेशेवर अपराधी भी नहीं था। 
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Asad Ahmed Encounter - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झांसी में एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में माफिया अतीक अहमद के पांच लाख के इनामी बेटे असद अहमद के मारे जाने के बाद उसे मुहल्ले चकिया के लोगों में शुक्रवार को गम और गुस्सा दोनों नजर आया। एक तरफ महिलाएं बुर्के में मातमपुरसी के लिए बैठी रहीं, तो पड़ोसियों से लेकर नाते-रिश्तेदारों और जानने वालों की दिन भर भीड़ लगती रही। 
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कब्र की खुदाई के बीच वहां पहुंचे लोगों ने एसटीएफ की कार्रवाई पर सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि असद के गुनाहों का फैसला कोर्ट के ऊपर छोड़ देना चाहिए था। एसटीएफ ने मुठभेड़ में उसे ढेर कर न्याय नहीं किया। 

उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी पांच लाख रुपये के इनामी असद अहमद के एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में मारे जाने के लेकर शुक्रवार को चकिया में आस पड़ोस के लोगों ने नाराजगी भरी प्रतिक्रिया दी। अतीक के पुश्तैनी मकान पर पहुंचे शम्सुलरहमान का कहना था कि असद के गुनाहों का फैसला कोर्ट के ऊपर छोड़ना चाहिए था। एसटीएफ ने जो किया वह न्याय नहीं है। 
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इस बात को हर इंसान महसूस कर रहा है। असद पुराना और पेशेवर अपराधी नहीं था कि उसे इस तरह मुठभेड़ में मारा गया। बुजुर्ग उबैद अहमद का कहना था कि किसी को मजहब के नाम पर इस तरह की सजा नहीं दी जानी चाहिए। असद को पकड़ा जा सकता था। उसने गुनाह किया था तो उसे उसकी कोर्ट के जरिए सजा दिलाई जानी चाहिए थी। 

असद को उसके गुनाहों की सजा दिलाने की प्रक्रिया न अपनाया जाना अफसोसजनक है। इसी तरह जावेद अंसारी ने भी एसटीएफ के तरीके के प्रति असहमति जताई। कहा कि जिस तरह पुलिस और एसटीएफ बर्ताव कर रही है, उससे मानवाधिकारों की बलि चढ़नी तय है। जावेद कहते हैं कि अभी असद बहुत ही कम उम्र का था। 

 
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किसी को गोली मारने में पहली बार उसका नाम आया था। उसे सुधरने का मौका दिया जाना चाहिए था। असद को पकड़कर पूछताछ की जानी चाहिए थी और उसे जेल भेजकर उसके खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए था। इसी तरह सुल्तान हैदर भी एसटीएफ की कार्रवाई को गलत ठहराते हैं। वह कहते हैं कि इसी तरह होता रहा तो लोगों का कानून-व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा।
 
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