इस भर्ती में शामिल जो अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं, वे लगातार मांग कर रहे थे कि नई भर्ती में शामिल होने के लिए उन्हें आयु सीमा में छूट दी जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग को वर्ष 2017-18 से एपीएस के पदों का टुकड़ों में अधियाचन मिलता रहा है, लेकिन आयोग ने नई भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं किया।
अगर आयोग वक्त रहते विज्ञापन जारी कर देता तो ओवरएज होने से पहले हजारों अभ्यर्थियों को नई भर्ती में शामिल होने का मौका मिल जाता। एपीएस भर्ती-2013 का मामला हाईकोर्ट में है। ओवरएज अभ्यर्थियों का कहना है कि अधियाचन होने के बावजूद आयोग ने न तो समय से विज्ञापन जारी किया और न ही उन्हें आयु सीमा में छूट दी। अभ्यर्थी इस मसले पर न्यायालय की शरण में जाएंगे।
फिलहाल, 19 सितंबर को भर्ती का विस्तृत विज्ञापन जारी होने के बाद यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि एपीएस भर्ती-2010 और एपीएस भर्ती-2013 की तरह एपीएस भर्ती-2023 में अभ्यर्थियों को शॉर्टहैंड में आठ फीसदी की गलती तक छूट मिलेगी या नहीं, क्योंकि इसी मामले को लेकर दोनों भर्तियों में विवाद हुआ था। एपीएस-2010 के मामले में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया था और एपीएस-2013 की परीक्षा आयोग ने निरस्त कर दी थी।