2004 में भोला खान व एजेंट ने मुख्यमंत्री को अर्जी देकर प्लाट संख्या 1081 व 108/4, 108/5 व 1093/190 पर कब्रिस्तान दर्ज करने की मांग की। तीन दिसंबर 2004 को तीनों प्लाट उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज हो गई। बाद में प्लाट 1081 भी कब्रिस्तान के नाम दर्ज हो गया।
इसका पता चलने पर गांव वालों ने 16 जून 20 को एसडीएम को अर्जी दी। आठ सदस्यीय कमेटी गठित की गई। उसने जांच रिपोर्ट पेश की। प्लाट 1081 से कब्रिस्तान का नाम हटाने को कहा गया। किंतु तमाम अर्जियों के बाद भी कुछ नहीं हो सका। पांच नवंबर 2021 को याची ने रिकॉर्ड दुरुस्त करने की अर्जी दी। डीजीसी से विधिक राय ली गई। कोई कार्रवाई न होने पर याचिका दायर की गई।
कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा। इच्छित जानकारी न मिलने पर अधिकारी तलब हुए। कोर्ट में प्लाट संख्या 1081 का रिकॉर्ड पेश किया गया। पता चला कि शुरुआत में 1081 मंदिर के नाम दर्ज थी। बाद में दो बार बदलाव किया गया। याची को इसकी जानकारी नहीं दी गई। सुनवाई करते दौरान 1970 व 1991 के आदेश की जानकारी हुई तो कोर्ट ने याची को संशोधन अर्जी दाखिल करने की अनुमति दी। जिससे दोनों आदेश को चुनौती दी गई।
प्लाट संख्या 1081 पर पोखर दर्ज करते समय प्लाट संख्या बदलकर 1081/1 कर दिया गया, रकबा वहीं रहा। कोर्ट ने कहा याची ने इस कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया था, रिकाॅल अर्जी दे सकता था। धारा 186 की कार्यवाही में भूमिधर को नोटिस बगैर आदेश नहीं दिया जा सकता। प्लाट संख्या 1081 में कई हिस्से हैं। मंदिर का हिस्सा अलग है जिससे कब्रिस्तान का कोई संबंध नहीं है। मंदिर के हिस्से का प्लाट संख्या 1081/1 बदल गया। जिसकी दुरुस्तीकरण कार्यवाही का आदेश देते हुए याचिका मंजूर की गई है।