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हाईकोर्ट का आदेश : शाहपुर गांव की जमीन का रकबा बांके बिहारी जी विराजमान के नाम से हो दर्ज

Sun, 17 Sep 2023 04:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने कहा कि प्लाॅट संख्या 1081 एम रकबा 0.3450 हेक्टेयर व 1081 एम रकबा 15.9700 हेक्टेयर कब्रिस्तान के नाम है और प्लाट संख्या 1081 जो बाद में बदल कर 1081/1 कर दिया गया का रकबा 0.1460 हेक्टेयर है।
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बांके बिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा की छाता तहसील के शाहपुर गांव के मंदिर बांके बिहारी जी विराजमान के नाम दर्ज जमीन को 13 अगस्त 1970 को गांव सभा के नाम दर्ज करने फिर 21 साल बाद 30 अक्तूबर 1991 के आदेश से पोखर के रूप में दर्ज करने के आदेशों को रद्द कर दिया है। तहसीलदार, एसडीएम को एक माह में इस जमीन को मंदिर बांके बिहारी जी विराजमान के नाम दर्ज करने की कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया है।

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कोर्ट ने कहा कि प्लाॅट संख्या 1081 एम रकबा 0.3450 हेक्टेयर व 1081 एम रकबा 15.9700 हेक्टेयर कब्रिस्तान के नाम है और प्लाट संख्या 1081 जो बाद में बदल कर 1081/1 कर दिया गया का रकबा 0.1460 हेक्टेयर है। यह मंदिर की जमीन है, जिसे बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए राजस्व अधिकारियों ने पहले पुरानी आबादी व बाद में पोखर के नाम दर्ज किया। मंदिर के हिस्से की जमीन से कब्रिस्तान का कोई सरोकार नहीं है। कब्रिस्तान की जमीन मंदिर की जमीन से अलग है।

कोर्ट ने शुरुआत में मंदिर के हिस्से की जमीन पर उसका नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने श्री बिहारी जी सेवा ट्रस्ट की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। मामले में प्लॉट 1081 रकबा 0.36 एकड़, जो 0.1460 हेक्टेयर होता है। 1375 फसली से 1377 फसली तक मंदिर की भूमिधरी जमीन थी। मंदिर के नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज थी। प्लाट संख्या 108 चकमार्ग था।

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2004 में भोला खान व एजेंट ने मुख्यमंत्री को अर्जी देकर प्लाट संख्या 1081 व 108/4, 108/5 व 1093/190 पर कब्रिस्तान दर्ज करने की मांग की। तीन दिसंबर 2004 को तीनों प्लाट उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज हो गई। बाद में प्लाट 1081 भी कब्रिस्तान के नाम दर्ज हो गया।

इसका पता चलने पर गांव वालों ने 16 जून 20 को एसडीएम को अर्जी दी। आठ सदस्यीय कमेटी गठित की गई। उसने जांच रिपोर्ट पेश की। प्लाट 1081 से कब्रिस्तान का नाम हटाने को कहा गया। किंतु तमाम अर्जियों के बाद भी कुछ नहीं हो सका। पांच नवंबर 2021 को याची ने रिकॉर्ड दुरुस्त करने की अर्जी दी। डीजीसी से विधिक राय ली गई। कोई कार्रवाई न होने पर याचिका दायर की गई।
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कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा। इच्छित जानकारी न मिलने पर अधिकारी तलब हुए। कोर्ट में प्लाट संख्या 1081 का रिकॉर्ड पेश किया गया। पता चला कि शुरुआत में 1081 मंदिर के नाम दर्ज थी। बाद में दो बार बदलाव किया गया। याची को इसकी जानकारी नहीं दी गई। सुनवाई करते दौरान 1970 व 1991 के आदेश की जानकारी हुई तो कोर्ट ने याची को संशोधन अर्जी दाखिल करने की अनुमति दी। जिससे दोनों आदेश को चुनौती दी गई।


प्लाट संख्या 1081 पर पोखर दर्ज करते समय प्लाट संख्या बदलकर 1081/1 कर दिया गया, रकबा वहीं रहा। कोर्ट ने कहा याची ने इस कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया था, रिकाॅल अर्जी दे सकता था। धारा 186 की कार्यवाही में भूमिधर को नोटिस बगैर आदेश नहीं दिया जा सकता। प्लाट संख्या 1081 में कई हिस्से हैं। मंदिर का हिस्सा अलग है जिससे कब्रिस्तान का कोई संबंध नहीं है। मंदिर के हिस्से का प्लाट संख्या 1081/1 बदल गया। जिसकी दुरुस्तीकरण कार्यवाही का आदेश देते हुए याचिका मंजूर की गई है।
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