शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
माघ मेले में बद्रिकाश्रम ज्योतिष्पीठ को जमीन और सुविधाएं नहीं मिलने के खिलाफ शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई है। याचिका दाखिल कर कहा है कि उनको ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य मानते हुए जमीन और सुविधाएं दी जाएं। याचिका में कहा गया कि मेला प्रशासन स्वामी स्वरूपानंद के प्रत्यावेदन पर निर्णय नहीं ले रहा है, जबकि भारत धर्म महामंडल और काशी विद्वत परिषद ने उनका शंकराचार्य के पद पर अभिषेक किया है।
याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता एमडी सिंह शेखर ने शंकराचार्य का पक्ष रखा। अपर महाधिवक्ता अजीत सिंह ने कोर्ट को बताया कि मेला प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद का प्रत्यावेदन खारिज कर दिया है। इस पर मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति एसडी सिंह की पीठ ने याची के अधिवक्ता को प्रशासन के आदेश को चुनौती देने के लिए याचिका में संशोधन की अर्जी दाखिल करने का समय दिया है। शंकराचार्य के अधिवक्ता का कहना था कि 1989 में सिविल कोर्ट ने स्थायी निषेधाज्ञा जारी कर स्वामी वासुदेवानंद को शंकराचार्य की पदवी धारण करने से रोक दिया था। इसके बाद सिविल कोर्ट ने शंकराचार्य की गद्दी पर वासुदेवानंद का दावा खारिज कर दिया। इसके खिलाफ दाखिल अपील पर हाईकोर्ट ने स्वरूपानंद और वासुदेवानंद दोनों को शंकराचार्य नहीं माना तथा काशी विद्वत परिषद, भारत धर्म महामंडल और तीनों शंकराचार्यों को योग्य संन्यासी को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बनाने का निर्देश दिया। इसके बाद स्वामी स्वरूपानंद को पुन: शंकराचार्य बना दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी।