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आयोग का एक और विवादित फैसला

Sat, 02 May 2015 02:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
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इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के एक और फैसले को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। साथ में अफसरों की मंशा पर भी सवाल उठने लगे हैं। आयोग की बैठक में हुए निर्णय के अनुसार अंतिम परिणाम में भी अब परीक्षार्थियों का नाम घोषित नहीं किया जाएगा। सिर्फ रोल और रजिस्ट्रेशन नंबर होगा। इतना ही नहीं अंकपत्र पर भी नाम दर्ज नहीं होगा। आयोग के इस फैसले के खिलाफ नया विवाद खड़ा हो गया है।
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आयोग की भर्तियों में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के परिणाम में तो सिर्फ रोल नंबर दर्ज होता है लेकिन अंतिम परिणाम में चयनित अभ्यर्थियों के नाम घोषित किए जाते हैं। पीसीएस, लोअर सबऑर्डिनेट, समीक्षा अधिकारी-सहायेक समीक्षा अधिकारी जैसी बड़ी भर्तियों समेत सभी परीक्षाओं के रिजल्ट में इसका पालन किया जाता है। अभ्यर्थियों की मार्कशीट पर तो सफल और असफल सभी अभ्यर्थियों के नाम होते हैं लेकिन आयोग के नए फैसले के तहत चयनितों के नाम भी अब गोपनीय रहेंगे। आयोग की 22 अप्रैल को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है। इसके अनुसार सिर्फ अनुक्रमांक और रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर रिजल्ट घोषित किए जाएंगे।

इसके अनुपालन के लिए सभी संबंधित अनुभागों को लिखा गया है। आयोग में इससे पहले अक्तूबर 2013 में भी निर्णय लिया गया था कि अभ्यर्थियों के नाम के आगे जाति नहीं लिखी जाएगी। इसे लेकर भी काफी विवाद हुआ था। कई प्रतियोगियों के खिलाफ एफआईआर भी लिखाई गई थी।
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डॉ.अनिल यादव के अध्यक्ष बनने के बाद आयोग की भर्तियों में किसी खास जाति के अभ्यर्थियों की सफलता का ग्राफ अचानक बढ़ने का आरोप लगता रहा है। इसके खिलाफ प्रतियोगी आंदोलनरत हैं। इन आरोपों के बीच आयोग ने मार्कशीट देखने की प्रक्रिया काफी जटिल कर दी है। इसके अलावा भी कई कदम उठाए गए हैं जिससे कि कोई दूसरा मार्कशीट न देख सके। ऐसे में अब अंतिम परिणाम में नाम घोषित करने के फैसले के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।

केवल रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर रिजल्ट घोषित करने के आयोग के निर्णय के खिलाफ प्रतियोगी एक बार फिर आंदोलन की तैयारी में हैं। उनका आरोप है कि  धांधली छिपाने के लिए आयोग में एक के बाद एक विवादित निर्णय लिए जा रहे हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में प्रतियोगियों का कहना था कि आने वाले दिनों में कई रिजल्ट घोषित होने हैं। उनका कहना था कि डॉ.अनिल यादव के अध्यक्ष बनने के बाद एक खास जाति के लोगों के सफल होने की संख्या अचानक काफी बढ़ गई है। अवनीश पांडेय, अयोध्या सिंह आदि ने आरोप लगाया कि यह निर्णय इस तरह की गड़बड़ियों को छिपाने के लिए लिया गया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि इसके खिलाफ वे आंदोलन चलाने के साथ राज्यपाल से भी शिकायत करेंगे।

पीसीएस-2015 प्रारंभिक परीक्षा पेपर लीक मामले में उत्तर प्रदेश लोग सेवा आयोग हमेशा अनदेखी करता रहा है। चौतरफा दबाव के बाद आयोग ने जांच की औपचारिकता पूरी करके एक पेपर की परीक्षा तो निरस्त कर दी लेकिन अब एसटीएफ की एफआईआर की कॉपी सामने आने के बाद आयोग की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। नियमानुसार परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है या शिकायत होती है तो आयोग प्रतिनिधि की ओर से इसकी सूचना तत्काल परीक्षा अनुभाग को देनी चाहिए।

इसके विपरीत एफआईआर में सुबह आठ बजे ही पेपर की सील खोले जाने की बात लिखी गई है। जबकि वह परीक्षा के आधा घंटा पहले यानी, सुबह नौ बजे खुलनी चाहिए थी। इतना नहीं डीजीपी के पास भी पेपर डेढ़ घंटे पहले पहुंच गया लेकिन आयोग प्रतिनिधि की ओर से पेपर लीक की बात को लगातार नकारा जाता रहा। आयोग के सचिव तथा अन्य अफसर भी देर रात तक पेपर लीक होने की बात नकारते रहे। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि आयोग के सदस्यों को इसकी जांच करनी पड़नी पड़ी। इसके लिए काफी दबाव के बाद निर्णय लिया गया। सदस्यों की जांच रिपोर्ट पर एक पेपर निरस्त करने का निर्णय भी अगले दिन लिया गया। इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने याचिका भी दाखिल की है।

0 आयोग के मामले में केंद्र और प्रदेश सरकार की भूमिका से निराश प्रतियोगियों ने अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने का निर्णय लिया है। उनसे मिलने के लिए राहुल गांधी ने भी हामी भर दी है। जल्द ही समय निर्धारित कर प्रतियोगी उनसे मिलकर पूरी बात रखेंगे।


पीसीएस-2015 के निरस्त पेपर की परीक्षा 10 मई को होगी। प्रारंभिक परीक्षा 29 मार्च को हुई थी लेकिन पेपर लीक होने की वजह से पहला पेपर निरस्त कर दिया गया था। आयोग ने दोबारा हो रही परीक्षा का प्रवेश पत्र वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। अभ्यर्थी उसे डाउनलोडकर प्रिंट निकाल सकते हैं। आयोग ने अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र में बदलाव किया है।

पीसीएस-2015 प्रारंभिक परीक्षा के पेपर लीक मामले में शुक्रवार को एक और याचिका दाखिल की गई। याचिका भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अनिल उपाध्याय और आकांक्षा सिंह की ओर से दाखिल की गई है। इसमें आयोग के अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक को जिम्मेदार ठहराया गया है। मोर्चा की बैठक में आयोग अध्यक्ष को हटाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन की भी घोषणा की गई। बैठक में कौशल सिंह आदि मौजूद रहे।
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