हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों में सुरक्षा इंतजाम करने में हीलाहवाली पर प्रदेश सरकार को अदालत की कड़ी फटकार सुननी पड़ी है। हाईकोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था का मुकम्मल इंतजाम 13 मार्च से पहले पूरा होना है। समय कम होने के बावजूद प्रदेश सरकार का कोई भी प्रयास जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। इसे लेकर सुनवाई कर रही सात जजों की वृहदपीठ ने बुधवार को गहरी नाराजगी जाहिर की। तैयारी संबंधी जानकारियां आधी-अधूरी मिलने पर पीठ ने मुख्य सचिव सहित लोक निर्माण विभाग, वित्त और गृह विभागों के प्रमुख सचिवों को अगली तारीख पर हाजिर होने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं जो अधिकारी आज की सुनवाई में अदालत में मौजूद थे, उनको भी अगली तारीख पर हाजिरी से माफ नहीं किया गया है।
मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड की अध्यक्षता में सुनवाई कर रही सात जजों की वृहदपीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि सुरक्षा जैसे गंभीर मामले में उनके द्वारा बार-बार निर्देश देने के बावजूद अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। कोर्ट पिछली तारीख पर ही बायोमैट्रिक कार्ड, डीएफएमटी, सीसीटीवी कैमरे और लगेज स्कैनर जैसे उपकरणों को स्थापित नहीं कर पाने पर अप्रसन्नता जाहिर की थी। सरकार द्वारा इसके लिए बजट भी समय से जारी नहीं हो पाया था।
महाधिवक्ता ने बताया कि हाईकोर्ट की सुरक्षा के लिए एक डिप्टी एसपी सहित 197 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसमें से 30 रेडिया ऑपरेटर हैं। 15 फरवरी तक सभी तैयारियां पूरी हो जाएंगी और 28 फरवरी तक सुरक्षा उपकरण काम करने लगेंगे। बायोमैट्रिक कार्ड के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। शीघ्र ही कार्ड बनाने का कार्य प्रारंभ हो जाएगा। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट और नवगठित अदालतों के संबंध में वृहदपीठ के निर्देशों के अनुसार सरकार काम कर रही है। वृहदपीठ ने प्रमुख सचिव न्याय की नियुक्ति में हो रहे विलंब पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रमुख सचिव न्याय सरकार और न्यायपालिका के बीच की कड़ी होता है। सरकार दो माह से इस पद पर नियुक्ति नहीं कर पा रही है।