लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार करते अमिताभ बच्चन।
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रास्ते में बहुगुणा का पैर छूकर लिया आशीर्वाद
सर्किट हाउस से अमिताभ का काफिला निकला कि दूसरी ओर हेस्टिंग्ज रोड स्थित अपने बंगले से हेमवती नंदन बहुगुणा का भी काफिला निकल पड़ा। जैसे ही बहुगुणा की गाड़ी सामने आई, अमिताभ ने आग्रह कर उसे रुकवा लिया। उन्हें देख बहुगुणा भी कार से उतर गए। फिर क्या था, अमिताभ ने पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। तब अमिताभ का कहना था कि बाबूजी, मुझे आशीर्वाद दीजिए। बहुगुणा ने अमिताभ की पीठ थपथपाई और फिर कार में सवार होकर निकल गए।
इसके बाद अमिताभ कलक्ट्रेट के लिए रवाना हो गए थे। वहां नामांकन के बाद अपनी पहली चुनावी जनसभा में फिल्मों के हीरो ने कहा कि वह अभी राजनीति में जीरो हैं। अजय बताते हैं कि अमिताभ के बेहद सरल और अच्छे स्वभाव की सभी तारीफ कर रहे थे। कहते थे, इतने बड़े कलाकार होने के बावजूद वह एक आम आदमी की तरह सभी से मिल रहे हैं। जो आदमी जिस अंदाज और बोली में बोल रहा था, अमिताभ उसी रूप में जवाब दे रहे थे।
लोगों के लिए यह कायल होने की बात थी। फिर, अमिताभ ने अपने भाषण की शुरुआत अपने चेहरे का जिक्र करते हुए की। आगे कहा, मैं राजनीति का ककहरा भी नहीं जानता। राजनीति में जीरो हूं। आप सबका बेटा हूं, आशीर्वाद दीजिए।
लोकसभा चुनाव 1984 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में प्रचार करते अभिनेता अमिताभ बच्चन।
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बहुगुणा और अटल को हराने की बनी थी योजना
26 नवंबर 1984 की रात राजीव गांधी के कहने पर अचानक अमिताभ बच्चन को इलाहाबाद जाने के लिए कहा गया था। उन दिनों युवक कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे अजय श्रीवास्तव बताते हैं कि कि राजीव गांधी के करीबी रहे अरुण नेहरू ने उन दिनों विपक्ष के दो दिग्गज नेताओं को हराने के लिए व्यूहरचना की थी। इसमें तय हुआ था कि ग्वालियर से अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ माधवराव सिंधिया को उतारा जाए तो इलाहाबाद से हेमवती नंदन बहुगुणा के खिलाफ अमिताभ बच्चन को उम्मीदवार बनाया जाए।
उस रात अमिताभ और जया बच्चन को जहाज से लेकर अरुण नेहरू लखनऊ आए। फिर, उसी रात उन्हें कार से इलाहाबाद भेजा गया था। तब, बहुगुणा का राजनीतिक कद बहुत बड़ा था। राजनीतिक गलियारों में बहुगुणा की जीत भी सुनिश्चित मानी जा रही थी। मगर, चुनावी नतीजों से साफ है कि बहुगुणा बड़े नेता जरूर थे, लेकिन अमिताभ की लोकप्रियता के उफान के आगे सारे कयास धड़ाम हो गए।
चुनाव प्रचार करते अमिताभ बच्चन।
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मंच टूटने पर बोले अमिताभ...यही हाल होगा विपक्ष का
यह चुनावी किस्सा है इलाहाबाद सांसद रहे अमिताभ बच्चन से जुड़ा। बात 1985 के विधानसभा चुनाव के प्रचार की है। फिल्मी दुनिया से राजनीति के गलियारों में आए अमिताभ का जबर्दस्त क्रेज था। उन्हें सोरांव पूर्वी विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी भोला सिंह के समर्थन में रखी गई चुनावी सभा के लिए बुलाया गया।
भोला सिंह का यह पहला चुनाव था। सभा रखी गई थी सोरांव चौराहे पर शाम सात बजे। इस जनसभा के चश्मदीद और सोरांव के मेवालाल इंटर कॉलेज के प्रबंधक चंद्र प्रकाशधर द्विवेदी बताते हैं कि अमिताभ को पहुंचते-पहुंचते रात के दो बज गए थे। सात घंटे का इंतजार करते-करते लोग थके जरूर, लेकिन डटे वहीं रहे।
जैसे ही अमिताभ के आने की घोषणा हुई, अलसाए लोगों में नया जोश भर गया। अमिताभ मंच पर चढ़े। पीछे से फोटो खिंचाने और नजदीक पहुंचने के चक्कर में दूसरे नेता और कार्यकर्ता भी ऊपर आ गए। इस बीच, अमिताभ ने बोलने के लिए माइक थाम लिया। तभी, तख्त से बना मंच भीड़ के बोझ से टूट गया।
दूसरे नेताओं के साथ अमिताभ भी लड़खड़ा गए। हालांकि, उन्होंने माइक नहीं छोड़ा। संभलकर खड़े हुए और बोले, जो हाल इस मंच का हुआ है, वही हाल विपक्ष का होगा। इस एक डायलॉग ने लोगों की थकान उतार दी। हुआ भी यही। चुनावी नतीजे आए तो भोला सिंह भारी मतों से विजयी हो चुके थे।