दशाश्वमेध घाट पर चल रही है तैयारी।
- फोटो : अमर उजाला।
रविवार को यहां जेसीबी से कच्चे घाट को समतल करने का काम शुरू हुआ, वहीं ट्राली से रेत भी पाटी जाती रही। वहीं, दूसरी ओर कहीं खुले नाले से दुर्गंध उठती रही, तो कहीं पनाला जेसीबी से बंद किया जाता रहा।
सावन चार जुलाई को लग जाएगा। इसी के साथ कांवड़ यात्रा का श्रीगणेश हो जाएगा। सावन शुरू होने में महज एक दिन शेष है, लेकिन दशाश्वमेध घाट पर अभी तक न तो सफाई की व्यवस्था की गई है और न ही घाट तक जाने वाले मार्ग का समतलीकरण पूरा हो सका है। रविवार को बालू की बोरियों को भरने और दो तरफ से घाट पर उतरने के लिए रास्ता बनाने का काम शुरू हुआ।
भीड़ के अनुमान को देखते हुए अब तक की तैयारियां जीरो ही कही जाएंगी। कांवड़ियों का जत्था दशाश्वमेध घाट से जल भरने आएगा तो यहां जगह-जगह गड्ढे और बहते पनाले मिलेंगे। नाले से उठती दुर्गंध के साथ ही फिसल कर गिरने का भी खतरा रहेगा।
नगर निगम की जिम्मेदारी यहां पर कांवड़ियों के लिए मार्ग तैयार करने की है, लेकिन, यहां का अभी काम शुरू हो सका है। तीर्थपुरोहित राजेंद्र कुमार मिश्र छोटे पंडित बताते हैं कि तैयारियां हफ्ते भर पहले शुरू हो जानी चाहिए थीं, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हो सका है। जिस तरह आनन-फानन बालू की बोरियां भरने का काम शुरू हुआ है, उससे तय है कि तैयारी मुकम्मल करने में अभी हफ्ते भर का समय लग सकता है। जिस रास्ते से कांवरिये गंगा तट तक पहुंचेंगे, उसी रास्ते पर नालियों का गंदा पानी बह रहा है और दुर्गंध उठ रही है। हालत यह है कि इस कच्चे घाट के बड़े हिस्से में बालू की बोरियां बिछाने में वक्त लगेगा।
दशाश्वमेध घाट पर पहुंचने लगे कांवड़िये
प्रयागराज। दशाश्वमेध घाट पर सावन मास में कांवड़ियों का रेला गंगा जल भरने के लिए उमड़ने का अनुमान है। रविवार से ही भोले भक्तों की भीड़ आने लगी। महिलाएं, बच्चे और युवा भगवा रंग में रंगने लगे हैं। बोल बम के जयकारे लगाते हुए मध्यप्रदेश, बिहार के सैकड़ों भक्तों ने दशाश्वमेध घाट पर जल भरा और वहां से बाबा बैजनाथ धाम के लिए रवाना हो गए।