उच्च न्यायालय से और सर्वोच्च न्यायालय से दंडित होने के बाद समय सीमा में अपील न करने पाने वाले अभियुक्त अब सीधे राज्यपाल और राष्ट्रपति से गुहार लगा सकेंगे।आईपीसी ब्रिटिश कानून था, जो भारतीयों को दंडित करने के लिए बनाया गया था। अब भारतीय न्याय संहिता न्याय की अवधारणा लेकर आई है। नए कानून में महिलाओं को न्याय मिलेगा। - स्वाति अग्रवाल, अधिवक्ता उच्च न्यायालय।
सीआरपीसी की जगह लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 187 पुलिस रिमांड को 60 -90 दिन तक बढ़ाने का प्राविधान करती है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक यह 15 दिन से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। इससे पुलिस हिरासत में होने वाली मौतें और मानवाधिकार हनन की घटनाएं बढ़ेगी। -आशुतोष तिवारी, अधिवक्ता उच्च न्यायालय
भारतीय न्याय संहिता में महज 10 धाराएं जोड़ी और चार हटाई गई हैं। यह काम किताब बदले बिना संशोधन के जरिए भी किया जा सकता था। बीएनएस की धारा 111 के तहत जन आंदोलन करने पर अजीवन कारावास तक सजा होगी तो धारा 113 के तहत सरकार के खिलाफ लिखने और भाषण देने को संप्रभुता के लिए खतरा बता कर दंडित किया जा सकेगा। - राय साहब यादव, अधिवक्ता उच्च न्यायलय
समय संग बदलाव ठीक है, लेकिन ये भी जरूरी है कि मौलिक अधिकार बचा रहे। बीएनएसएस के मुताबिक पुलिस एफआईआर दर्ज करने में तीन से 14 दिन तक का समय ले सकती है। दोबारा किए गए अपराध में जमानत का अधिकार खत्म होगा। - अरविंद कुमार राय,अधिवक्ता उच्च न्यायालय
1860 से लागू आईपीसी में बदलाव समय की मांग थी। धाराओं में हुए बदलाव से वकालत में व्यावहारिक दिक्कत तो होगी, लेकिन समय लगेगा पर धीरे -धीरे प्रचलन में आ जाएगा। नया कानून है सुधार की जरूरत है। - अभिषेक आहूजा, अधिवक्ता उच्च न्यायालय
साक्ष्य अधिनियम में इलेक्ट्रानिक साक्ष्य का दायरा बढ़ाया गया है। इससे न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी, लेकिन फोरेंसिक लैब न होना बड़ी मुसीबत है। कानून तभी कामयाब हो सकता है जब उसके क्रियान्वयन की समुचित व्यवस्था हो। - मनु शर्मा, अधिवक्ता उच्च न्यायालय
नए कलेवर में पुराने कानून ही हैं। तकनीकी बदलाव समय की की जरूरत है, लेकिन अतार्किक बदलाव बोझ सरीखा है। लोगों को अब दाेनों कानून पढ़ने पड़ रहे हैं। - राजू सिंह, अधिवक्ता उच्च न्यायालय
जिस समय देश की दिशा-दशा बदलने वाले कानून पर विस्तृत चर्चा होनी थी, उस वक्त विपक्ष के सौ से ज्यादा सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। ऐसे में बिना व्यापक चर्चा के लागू कानून संशोधन योग्य है। - केसी यादव,अधिवक्ता उच्च न्यायालय
नया कानून सरकार की जिद के अलावा कुछ नहीं है। विश्व में सबसे बेहतरीन दंड संहिता आईपीसी थी। समय-समय पर जरूरत के अनुसार संशोधन हुआ है। अब नए कानून और पुराने कानून में वकील, मुवक्किल और अदालत सब कई वर्षों उलझे रहेंगे। -जनार्दन यादव, अधिवक्ता उच्च न्यायालय
अपराधों की प्रकृति बदल रही है। लेकिन, कानून नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए होने चाहिए। नया कानून नागरिक सुरक्षा से ज्यादा पुलिस राज स्थापित करने की दिशा में अग्रसर होगा। - हरे राम तिवारी,अधिवक्ता उच्च न्यायालय