जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की तिथि नजदीक आने के साथ ही पंचायत सदस्यों को अपने पाले में शामिल करने के लिए भाजपा और सपा द्वारा पूरा जोर लगाया जा रहा है। इस बीच सपाइयों ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के इशारे पर पुलिस और प्रशासन के अफसर पंचायत सदस्यों और उनके परिवार के लोगों पर तमाम तरह के दवाब बना रहे हैं। कुछ पंचायत सदस्यों को धमकी भी दी गई है।
पार्टी के जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव की अगुवाई में कलक्ट्रेट पहुंचे सपा के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा। कहा कि कुछ पंचायत सदस्यों को उनके खिलाफ फर्जी मुकदमें की भी धमकी दी गई है। ताकि दबाव में आकर पंचायत सदस्य सत्ताधारी दल के प्रत्याशी को अपना वोट दें। सात सूत्रीय ज्ञापन में सदस्यों को डराने, धमकाने, लालच देने, परिवार के नौकरी-पेशा लोगों के निलंबल एवं स्थानांतरण कराने, पैसों का लालच देकर वोट हासिल करने के लिए सत्ताधारी पार्टी के लोग दबाव बना रहे हैं।
ज्ञापन के माध्यम से कहा गया कि निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए केंद्रीय पुलिस बल की तैनाती के साथ मतदान स्थल पर सीसीटीवी कैमरा, वीडियो ग्राफी आदि की व्यवस्था सरकार द्वारा करवाई जाए। सपा नेताओं ने यह भी कहा कि जो सदस्य साक्षर और पढ़े-लिखे हैं उन्हें किसी भी प्रकार का सहायक न दिया जाय। सपा नेताओं ने वर्ष 2011 में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि तब सपा के कुल 25 सदस्य विजयी हुए थे, लेकिन प्रत्याशी को महज पांच वोट ही मिले सके। इस अवसर पर महानगर अध्यक्ष सैय्यद इफ्तेखार हुसैन, पूर्व सांसद धर्मराज पटेल, राम मिलन यादव, राम सुमेर पाल, राम कृपाल कोल, राम देव निडर, दूधनाथ पटेल, दान बहादुर मधुर, मोहम्मद परवेज आदि मौजूद रहे।