prayagraj news : इलाहाबाद विश्वविद्यालय।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के शिक्षाशास्त्र और दर्शनशास्त्र विभाग में पीएचडी प्रवेश में धांधली के आरोप लगाए गए हैं। शिक्षशास्त्र विभाग में जाति विशेष के अभ्यर्थियों को चयन में प्राथमिकता देने और दर्शनशास्त्र विभाग में क्रेट-2020 के टॉपर को चयन से वंचित करने के आरोप हैं। मामले में कुलपति, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और राज्यपाल को पत्र भेजकर शिकायत दर्ज कराई गई है। हालांकि इविवि प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है।
दर्शनशास्त्र विभाग की क्रेट-2020 परीक्षा में शामिल हुए अभिनंदन पांडेय ने लिखित परीक्षा में टॉप किया था, लेकिन इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका चयन नहीं हुआ। अभिनंदन ने मामले में कुलपति को पत्र भेजकर शिकायत दर्ज कराई है। इविवि में एमए दर्शनशास्त्र के छात्र रहे अभिनंदन ने महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में भी पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में टॉप किया है। अभिनंदन ने कुलपति को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि विभागाध्यक्ष का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा। सभी सीटों पर चयन में जेआरएफ छात्रों को प्राथमिकता दी गई। अगर ऐसा ही होना था तो लिखित परीक्षा कराने की क्या जरूरत थी।
दूसरी ओर इविवि छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री शिवम सिंह ने पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि शिक्षाशास्त्र विभाग में सत्र 2020-21 के तहत पीएचडी प्रवेश में चयन समिति ने ओबीसी वर्ग में जाति विशेष को चयन में वरीयता दी है। शिवम ने मामले की जांच करने और नए सिरे से प्रवेश की मांग उठाई है। इसके अलावा अन्य तमाम छात्रों ने विभागाध्यक्ष पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए चयनितों की सूची सोशल मीडिया पर वायरल कर दी है। वहीं, इविवि की पीआरओ डॉ. जया कपूर ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि क्रेट के तहत किसी भी छात्र का अंतिम चयन उसके क्रेट स्कोर, एकेडमिक स्कोर और इंटरव्यू के आधार पर होता है। साक्षात्कार एवं अंतिम चयन प्रक्रिया गठित समिति की ओर से नियमानुसार एवं पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है।