दोनाें ही आरोप निराधार: सचिव
विज्ञान परिषद के सचिव देवव्रत द्विवेदी का कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से लगाए गए दोनों ही आरोप निराधार हैं। विज्ञान पत्रिका एवं अनुसंधान पत्रिका का नियमित रूप से प्रकाशन हो रहा है। व्यावसायिक गतिविधियों के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मार्च-2023 में आपत्ति दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद व्यावसायिक गतिविधियां रोक दी गईं और इस बाबत विश्वविद्यालय को भी लिखित रूप से अवगत कराया गया था। इविवि की कार्य परिषद की ओर से लिए गए निर्णय की लिखित सूचना मिलने के बाद विज्ञान परिषद की कार्यकारिणी कोई निर्णय लेगी।
110 साल पहले हुई थी परिषद की स्थापना
विज्ञान परिषद की स्थापना 110 साल पहले वर्ष 1913 में हुई थी। तब विज्ञान परिषद के पास अपनी कोई जगह नहीं थी। सचिव के आवास से ही परिषद से संबंधित गतिविधियां संचालित की जातीं थीं। 1952 में इविवि की ओर से इंडियन प्रेस चौराहे के पास तकरीबन चार एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई, जिस पर विज्ञान परिषद ने अपने खर्च पर बिल्डिंग बनवाई। सचिव का कहना है कि विज्ञान परिषद परिसर में प्रतिमाह दो व्याख्यान भी आयोजित किए जाते हैं।
पांच नए शिक्षक नियुक्त, तीन को प्रमोशन
इविवि की कार्य परिषद ने गणित विभाग में पांच नए असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती पर अंतिम मुहर लगाई। अनारक्षित श्रेणी में डॉ. अल्पेश कुमार, एसएसी श्रेणी में डॉ. अनिल कुमार एवं डॉ. बिस्वजीत मल्लिक और ओबीसी श्रेणी में डॉ. अनूप कुमार सिंह एवं डॉ. हितेश रमेश के चयन पर मुहर लगाई गई। इसके साथ ही कैस प्रमोशन के तहत डॉ. अविनाश कुमार चतुर्वेदी एवं डॉ ज्ञान चंद्र सिंह यादव को स्टेज-2 से स्टेज-3 और डॉ. बृजेश कुमार शर्मा को स्टेज-3 से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नत किया गया।
हॉस्टलों में बने गैर कानूनी घर तोड़ने का निर्णय
कार्य परिषद ने एकमत से यह निर्णय भी लिया कि विश्वविद्यालय के विभिन्न हॉस्टलों में गैर कानूनी तरीके से घर बनाकर रह रहे लोगों को नोटिस दिया जाएगा और नोटिस में निश्चित समय अवधि के बाद इन सभी गैर कानूनी घरों को तोड़ दिया जाएगा।
सुविधाओं की निगरानी करेगी कोऑर्डिनेशन कमेटी
पिछले दिनों में इविवि में कई नई सुविधाएं शुरू की गईं। इनमें से कुछ विश्वविद्यालय ने उपलब्ध कराईं और कुछ स्मार्ट सिटी के तहत उपलब्ध कराई गईं हैं। कार्य परिषद ने निर्णय लिया कि कुलपति शिक्षकों की कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाएंगी, जो इन सुविधाओं के इस्तेमाल से जुड़े नियम, कानून आदि बनाएगी और इनकी देखरेख के लिए जिम्मेदार होगी।
कार्य परिषद ने ये निर्णय भी लिए
कार्यकारिणी ने निर्णय लिया कि सभी नवनियुक्त शिक्षकों का प्रोबेशन एक वर्ष के लिए बढ़ाकर अब दो वर्ष का किया जाएगा।
छात्रों द्वारा कुलपति से प्रो. अरुण गर्ग के खिलाफ की गई शिकायतों के संदर्भ में एक हाई पावर कमेटी का गठन किया गया।
तीन प्रोफेसरों पर आरोप लगाने वाली महिला शिक्षक के मामले में जांच अधिकारी नियुक्ति किया गया।