इससे पूर्व कॉलेजों में सिर्फ उन्हीं अभ्यर्थियाें को प्रवेश दिए जा रहे थे, जो सीयूईटी में शामिल हुए थे और उन्होंने इविवि में अपना पंजीकरण कराया था। इस अनिवार्यता के कारण कॉलेजों को प्रवेश के लिए अभ्यर्थी नहीं मिले और आधी से अधिक सीटें खाली रह गईं। हालांकि, इस अनिवार्यता को समाप्त किए जाने के बाद भी प्रवेश की गति बहुत तेज नहीं हुई है, लेकिन कुछ सीटें भरने की उम्मीद जगी है।
इविवि में वर्ष 1986 से प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिले की प्रक्रिया शुरू हुई थी और इसी के बाद कॉलेजों में भी प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिले होने लगे, लेकिन प्रवेश की स्थिति पिछले दो वर्षों से बिगड़ी है और उसी वक्त से सीयूईटी के माध्यम से दाखिले शुरू हुए हैं। सीयूईटी का परिणाम देर से आने के कारण इविवि और इसके संघटक कॉलेजों में सत्र लगातार पिछड़ रहा है।
अगर यही हालात रहे तो अगले साल भी कॉलेजों को इसी समस्या से जूझना पड़ सकता है। यही वजह है कि पिछले दिनों हुई इविवि की एकेडमिक काउंसलिंग की बैठक में यहां तक चर्चा हो गई कि इविवि एवं संघटक कॉलेजों में अगले साल से सीयूईटी के माध्यम से स्नातक में दाखिले लिए जाएं या विश्वविद्यालय पूर्व की भांति अपने स्तर से प्रवेश परीक्षा कराए। हालांकि, इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।