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Allahabad University : इलाहाबाद विवि में चार वर्ष की होगी स्नातक की पढ़ाई, कार्यपरिषद की बैठक में हुआ निर्णय

Fri, 07 Mar 2025 06:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय और संघटक कॉलेजों में स्नातक की पढ़ाई अब चार साल की होगी। यह व्यवस्था आगामी सत्र से ही लागू होगी। कार्यपरिषद की शुक्रवार को हुई बैठक में इस पर निर्णय लिया गया। 
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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प्रयागराज। नई शिक्षा नीति के तहत इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) और संघटक कॉलेजों में स्नातक की पढ़ाई अब चार साल की होगी। यह व्यवस्था आगामी सत्र से ही लागू होगी। कार्यपरिषद की शुक्रवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। पाठ्यक्रम एवं परीक्षा प्रारूप तैयार कर जल्द की विद्वत परिषद में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

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इविवि और कॉलेजों में स्नातक में अभी तीन वर्ष की पढ़ाई होती है। चुनिंदा विषयों में ही चार साल का स्नातक कोर्स संचालित होता है। इसके विपरीत नई शिक्षा नीति के तहत स्नातक के सभी पाठ्यक्रमों को चार साल कर दिया गया है। इसके अलावा सेमेस्टर सिस्टम भी लागू कर दिया गया है। नई शिक्षा नीति को लागू करने का विश्वविद्यालय पर लगातार दबाव था, जिस पर अब अमल करने का निर्णय लिया गया है।

कार्यपरिषद की बैठक में सत्र 2025-26 से ही नई शिक्षा नीति के तहत स्नातक के सभी कोर्स को चार साल का करने का निर्णय लिया गया। इसी के साथ बीएसएसी, बीए, बीकॉम समेत अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर सिस्टम भी लागू होगा।

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कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि नई व्यवस्था के तहत पाठ्यक्रम एवं परीक्षा प्रारूप तैयार कर जल्द विद्वत परिषद की मंजूरी ली जाएगी। चूंकि, नई व्यवस्था आगामी सत्र से ही लागू होगी और इसके लिए दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि इसी महीने में नई व्यवस्था के तहत नया सिलेबस और परीक्षा प्रारूप तैयार कर विद्वत परिषद की मंजूरी ले ली जाएगी।

सीबीसीएस समेत अन्य बिंदुओं पर लेना होगा निर्णय

नई शिक्षा नीति में चार साल के स्नातक कोर्स एवं सेमेस्टर सिस्टम के अलावा कई प्रावधान हैं। इसके तहत च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस), पढ़ाई के दौरान विषय बदलने, अपने पसंद के टॉपिक से क्रेडिट प्राप्त करने, बीच में पढ़ाई छोड़ने के बावजूद सर्टिफिकेट, डिप्लोमा आदि का विकल्प खुले होने, पढ़ाई के दौरान संस्थान बदलने समेत कई अन्य प्रावधान भी शामिल हैं। नई व्यवस्था में विश्वविद्यालय को इन बिंदुओं पर भी नीति तय करनी होगी।

इविवि में नए रेशनलाइजेशन के तहत जल्द शुरू होगी भर्ती

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षकों के रिक्त पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। नए सिरे से तैयार रेशनलाइजेशन (पदों का क्रम और आरक्षण) तथा रोस्टर को कार्यपरिषद की बैठक में भी मंजूरी मिल गई। इसी के साथ बैठक में शिक्षकों की नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी कहा गया। बैठक में शिक्षक भर्ती, डिप्टी रजिस्टार तथा एमटीएस भर्ती के लिफाफे भी खोले गए। विगत वर्षों में शिक्षकों के कुल रिक्त 567 पदों के सापेक्ष 360 पर नियुक्ति हो चुकी है।

इसी के साथ गैर शिक्षण के भी करीब 740 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इसी क्रम में शिक्षकों के शेष पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से से पहले नए सिरे से रेशनलाइजेशन एवं रोस्टर लागू करने का निर्णय लिया गया। नए सिरे से तैयार रेशनलाइजेशन एवं रोस्टर कमेटी के प्रस्तावों को विद्वत परिषद की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। शुक्रवार को कार्यपरिषद की बैठक में भी इस पर मुहर लग गई। इसी के साथ शिक्षकों के रिक्त 200 से अधिक पदों के लिए जल्द विज्ञापन निकाले जाने की उम्मीद है।

पांच पदों पर नए शिक्षकों की हुई नियुक्ति

कार्यपरिषद की बैठक में गणित में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए हुए साक्षात्कार के नतीजे के लिफाफे खोले गए। इसके तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के पांच पदों पर नियुक्ति की गई है। इसमें दो अनारक्षित, दो ओबीसी और एक ईडब्ल्यूएस के पद हैं। योग्य अभ्यर्थी नहीं मिलने के कारण एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों पर कोई नियुक्ति नहीं हुई। अलग-अलग कारणों से उर्दू की सिलेक्शन कमेटी के लिफाफे भी नहीं खोले गए।

कार्यपरिषद में डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति का लिफाफा भी खोला गया। साक्षात्कार के आधार पर देवेश गोस्वामी की इस पद पर नियुक्ति की गई है। कार्यपरिषद की बैठक में गैर शिक्षक भर्तियों के लिए हुई लिखित परीक्षा के आधार पर 98 एमटीएस और 39 स्किल्ड एमटीएस पदों पर भी नियुक्ति को मंजूरी दी गई।

कार्यपरिषद में नई पेंशन योजना के अंतर्गत आने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी देने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा नव नियुक्त शिक्षकों की परिवीक्षा अवधि को भी दो वर्ष के स्थान पर एक साल करने का निर्णय लिया गया।
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अर्थशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपशिखा बर्खास्त

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.दीपशिखा सोनकर को बर्खास्त कर दिया गया है। कार्यपरिषद की शुक्रवार को हुई बैठक में उनकी सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया। डॉ.दीपशिखा ने विभाग के शिक्षकों पर उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। साथ ही न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपों को निराधार पाया था।

गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे वरिष्ठ शिक्षकों की निराधार शिकायतों और छवि धूमिल करने का कृत करार दिया था। इस बाबत जारी नोटिस पर जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया। डॉ.दीपशिखा सोनकर पर यह भी आरोप है कि मातृत्व अवकाश समाप्त होने के बाद भी दो वर्ष से अधिक समय तक वह विभाग में वापस नहीं आईं। इसे लेकर कई बार नोटिस जारी होने के बाद भी उन्होंने जवाब नहीं दिया। कार्यपरिषद ने इस व्यवहार को जानबूझकर अवज्ञा और आज्ञाभंग माना और सदस्यों ने डॉ.दीपशिखा की सेवाओं को समाप्त करने का फैसला लिया।
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