Prayagraj News : इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ऑऩलाइन परीक्षा के लिए आवेदन जमा करते छात्र।
- फोटो : प्रयागराज
ज्यादातर छात्र ऑनलाइन परीक्षा के पक्ष में
ज्यादातर विद्यार्थियों के हाथ में आवेदन नजर आए। छात्र-छात्राओं ने अपने आवेदन में यह भी स्पष्ट किया कि वे ऑनलाइन परीक्षाओं के पक्ष में क्यों हैं। उन्होंने आवेदन में यही लिखा था कि जब पूरे साल ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की गईं तो परीक्षाएं भी ऑनलाइन होनी चाहिए।
कई छात्रों ने अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों का उदाहरण दिया, जहां ऑनलाइन परीक्षाएं कराई गईं। छात्र नेता अजय यादव सम्राट का दावा है कि अकेले विश्वविद्यालय में ही ऑनलाइन परीक्षाओं के पक्ष में पांच हजार से अधिक आवेदन आए हैं।
सीएमपी के प्राचार्य डॉ. बृजेश कुमार के अनुसार कॉलेज में तीन हजार से अधिक आवेदन आए हैं। ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में 2016 आवेदन आए, जबकि इलाहाबाद डिग्री कॉलेज में 500 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किए। श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने ऑनलाइन परीक्षाओं के पक्ष में आवेदन किए।
आंदोलन की जगह आवेदन करने में व्यस्त रहे विद्यार्थी
ऑनलाइन परीक्षाओं की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को हुए बवाल के बाद शुक्रवार को परिसर में धरना-प्रदर्शन नहीं हुआ। हालांकि ज्यादात छात्र-छात्राएं ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए आंदोलन की जगह आवेदन लिखने और उसे जमा करने में व्यस्त रहे। पूरा दिन फॉर्म जमा करने के लिए लाइन में इंतजार करते बीत गया।
पुराछात्रों की मांग, वापस हो कार्रवाई
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी फैमिली के तहत पुराछात्रों ने चीफ प्रॉक्टर को पत्र लिखकर मांग की है कि छात्रों पर दर्ज मुकदमे और उनके खिलाफ हुई निलंबन एवं निष्कासन की कार्रवाई वापस ली जाए। पुराछात्र एवं इलाहाबाद यूनिवर्सिटी फैमिली के संस्थापक अंकित द्विवेदी ने चीफ प्रॉक्टर को लिखे पत्र में कहा है कि इविवि के पुराछात्र यहां पढ़ने वाले छात्रों के सीनियर एवं अभिभावक भी हैं।
अपने अनुजों को हम संवाद के माध्यम से समझाने का प्रयास करें। इसमें मुकदमे का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। छात्र-छात्राओं की मांगों को लंबित रखना भी शोभा नहीं देता। छात्रों के खिलफ कार्रवाई की करने की जगह पहले उनके अभिभावकों से बात करनी चाहिए। छात्रों का भविष्य बर्बाद न हो, इसलिए उन पर दर्ज मुकदमे और निलंबन एवं निष्कासन की कार्रवाई वापस होनी चाहिए।