अभ्यर्थियों ने आ़योग पर लगाया मनमानी का आरोप
अभ्यर्थियों का दावा है कि इसी वजह से आयोग उत्तर कुंजी जारी करने में विलंब कर रहा है। पीसीएस-2019 और पीसीएस-2020 इसका उदाहरण है, जिनमें चयनित अभ्यर्थी ज्वाइन भी कर चुके हैं और आयोग ने इसके बाद उत्तर कुंजी जारी की।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि आयोग ने पहली बार न्यायालय के आदेश पर पीसीएस-2015 की उत्तर कुंजी जारी की थी। उत्तरकुंजी जारी होने के बाद गलत प्रश्नों को लेकर याचिका दाखिल हुई थी, जो अब भी न्यायालय में लंबित है।
गलत प्रश्नों को लेकर दायर की गई है याचिका
अवनीश के अनुसार पीसीएस-2016 में भी गलत प्रश्नों को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी। यह मामला भी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। पीसीएस-2017 में गलत प्रश्नों को लेकर दाखिल याचिका पर उच्च न्यायालय ने परिणाम दोबारा जारी करने के आदेश दिए थे, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने आयोग के पक्ष में निर्णय दिया था।
पीसीएस-2018 में संशोधित उत्तर कुंजी की जगह आयोग ने अनंतिम उत्तर कुंजी दोबारा जारी कर दी थी और अभ्यर्थियों के न्यायालय जाने पर आयोग ने अपनी गलती सुधारते हुए संशोधित उत्तर कुंजी जारी की थी। अब पीसीएस-2019 और पीसीएस-2020 में गलत प्रश्नों को लेकर अभ्यर्थी न्यायालय जाने की तैयारी कर रहे हैं।