आमरण अनशन पर बैठे छात्रों का कहना है कि कोविड के दौरान प्रदेश और केंद्र सरकार की ओर से लगातार अपील की जा रही थी कि जो जहां है, वहीं पर रहे। जिला प्रशासन की ओर से बसें चलवाई गईं, जो पर्याप्त नहीं थीं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में चार दिनों से आमरण अनशन कर रहे छात्रों ने जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद समझौते की राह खोल दी है। छात्र यूजर चार्ज के लिए अधिकतम पांच हजार रुपये देने को तैयार हैं, जबकि इविवि प्रशासन ने ज्यादातर छात्रों को 15-15 हजार रुपये का नोटिस जारी कर रखा है। छात्रों का कहना है कि रविवार को विश्वविद्यालय प्रशासन अधिकतम पांच हजार रुपये यूजर चार्ज पर नहीं माना तो छात्र एक रुपया भी नहीं देंगे।
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आमरण अनशन पर बैठे छात्रों का कहना है कि कोविड के दौरान प्रदेश और केंद्र सरकार की ओर से लगातार अपील की जा रही थी कि जो जहां है, वहीं पर रहे। जिला प्रशासन की ओर से बसें चलवाई गईं, जो पर्याप्त नहीं थीं। दूसरे प्रदेश के तमाम छात्र हॉस्टल में ही रह गए और इविवि प्रशासन ने इसके लिए उन्हें अपनी सहमति भी दी थी। छात्र चौतरफा संकट में घिर थे। कैंटीन बंद थी, राशन खत्म हो चुका था और बाजार भी बंद थे। मजबूरी में अपने घर न लौट पाने के कारण छात्रों को हॉस्टल में ही रहना पड़ गया, लेकिन इविवि प्रशासन छात्रों को राहत देने के बजाय उनसे यूजर चार्ज वसूल रहा है।
छात्रों की डिग्री और मार्कशीट भी रोक ली गई है। छात्रों का कहना है कि जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद वे अधिकतम पांच हजार रुपये यूजर चार्ज देने को तैयार हैं, लेकिन इविवि प्रशासन इस पर भी सहमत नहीं है और कमेटी बनाकर मामले को टालने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि छात्रों से 15-15 हजार रुपये वसूले जा सकें। अनशनकारी छात्रों का कहना है कि अगर रविवार तक इविवि प्रशासन ने कोई निर्णय नहीं लिया तो इसके बाद छात्र एक रुपया भी जमा नहीं करेंगे।