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इलाहाबाद विश्वविद्यालय : कुलपति से वार्ता विफल, वापस नहीं होगा जुर्माना

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कुलपति से वार्ता विफल, वापस नहीं होगा जुर्माना
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों को जारी 15 हजार रुपये के जुर्माने का नोटिस इविवि प्रशासन वापस नहीं लेगा। बृहस्पतिवार को इस मुद्दे पर छात्रों और कुलपति के बीच हुई वार्ता विफल हो गई। जुर्माना वापस लेने की मांग को लेकर छात्र तीन दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
छात्र बृहस्पतिवार सुबह से ही कुलपति कार्यालय के बाहर इकट्ठा हो गए थे। धरना-प्रदर्शन के बाद छात्रों ने नारेबाजी भी शुरू कर दी। छात्रों ने नारे लगाए, ‘काम नहीं तो वेतन नहीं, निवास नहीं तो शुल्क नहीं।’ छात्रों का कहना है कि कोविड काल में हॉस्टल बंद थे तो जुर्माना क्यों लगाया गया। वहीं, इविवि प्रशासन का दावा है कि जुर्माना उन छात्रों पर लगाया, जो हॉस्टल के कमरे पर लबे ताले तोड़कर वहां रहने लगे। बृहस्पतिवार को इस मुद्दे पर आंदोलन तेज हुआ तो प्रशासन के हस्तक्षेप पर नॉर्थ हाल में कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच वार्ता कराई गई।
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कुलपति ने जुर्माना वापस लेने से मना कर दिया। इस पर नॉर्थ हाल के बाहर खड़े छात्र भड़क गए और नारेबाजी शुरू कर दी। तनावपूर्ण माहौल में सुरक्षा के बीच कुलपति वहां से चली गईं और छात्रों का आंदोलन जारी रहा। छात्रों ने कहा कि आंदोलन तक तक जारी रहेगा, जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन जुर्माने का नोटिस वापस नहीं लेगा। इस मौके पर छात्र नेता अखिलेश यादव, अतेंद्र सिंह, अजय यादव सम्राट, नवनीत यादव, राहुल पेल, अजय पांडेय, अभिषेक यादव, विवेक सुल्तानवी, मनीष कुमार, अखिल, यश, विकास, सुनील मौर्य आदि मौजूद रहे।
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इविवि प्रशासन का आरोप, छात्रों ने तोड़े हॉस्टल के ताले
जुर्माने के मुद्दे पर इविवि प्रशासन पीछे हटने को तैयार नहीं है। इविवि की पीआरओ डॉ. जया कपूर का कहना है कि कोविड-19 शटडाउन के दौरान छात्रों का हॉस्टल परिसर में प्रवेश अवैध था। उन्हें हॉस्टल एवं अन्य सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए पांच हजार रुपये प्रति माह की दर से भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे। साल भर के हिसाब से गणना की जाती तो धनराशि काफी अधिक होती, लेकिन बाद में इसे घटाकर अधिकतम 15 हजार रुपये तक सीमित कर दिया गया था। छात्रों ने बिना अनुमति ताले तोड़कर हॉस्टल में प्रवेश किया। वे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के दोषी है, लेकिन विश्वविद्यालय उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता है। उनको जिस 15 हजार रुपये का भुगतान करने को कहा गया है, वह हॉस्टल की नियमित फीस के बराबर है। उनसे ग्रीष्मकालीन अतिरिक्त भार नहीं लिया जा रहा। ऐसे में संबंधित छात्रों को भुगतान करने के पुन: निर्देश दिए जा रहे हैं।
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