इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) एवं संघटक कॉलेजों के शोधार्थियों को अपने शोध पत्रों, आलेखों, पुस्तकों में गाइड/सुपरवाइजर का नाम अनिवार्य रूप से देना होगा। इस बाबत डीन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. एसआरआई रिजवी ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। छात्रों ने इसका विरोध करते हुए दावा किया है कि इससे शोधार्थियों के परिश्रम एवं हक में जबर्दस्ती बंटवारा होगा। यह पूरी तरह से सेंधमारी है।
हालांकि डीन की ओर से 27 सितंबर 2021 को भी यह निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन शोधपत्र में गाइड/सुपरवाइर के नाम नहीं दिए गए। शिकायत मिलने के बाद डीन को रिमाइंडर जारी करना पड़ा कि इस पर अनिवार्य रूप से अमल किया जाए। इस मसले पर विश्वविद्यालय में छात्रसंघ बहाली के लिए 682 दिनों से आंदोलन कर रहे अजय यादव सम्राट एवं अन्य छात्र नेताओं का कहना है कि परिश्रम शोधार्थी करे और उसके द्वारा लिखे शोध पत्र पर नाम शोध निर्देशक का जाए, यह ठीक नहीं है। इसके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
असिस्टेंट प्रोफेसर की चयन प्रक्रिया में अकादमिक प्रदर्शन सूचकांक (एपीआई) में शोध पत्रों का अंक निर्धारित है। शोध पत्र पर एक से अधिक नाम होने पर अंक बंट जाते हैं। ऐसे में शिक्षक भर्ती में शमिल होने वाले शोधार्थी को नुकसान होगा। छात्रों ने सवाल उठाए हैं कि जब यूजीसी की गाइडलाइन में यह व्यवस्था नहीं है तो इसे क्यों लागू किया गया।
डीन प्रो. रिजवी का कहना है कि इससे गाइड/सुपरवाइजर की जिम्मेदारी तय होगी। प्लेग्यरिजम पर भी प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। छात्रों की पीएचडी तभी पूरी होती है, जब वे किसी गाइड/सुपरवाइजर के निर्देशन में शोध पूरा करते हैं। व्यवस्था में बदलाव से शोधपत्रों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।