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इलाहाबाद विश्वविद्यालय : हाईकोर्ट ने दीक्षांत के लिए अर्थशास्त्र की मेडल सूची रद्द की

Mon, 01 Nov 2021 09:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सवार्धिक अंक पाने वाले छात्र की तलाश कर मेडल देने के लिए कहा है। मेडल की चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने परास्नातक अर्थशास्त्र के छात्र अभिषेक कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने दिया है।
 
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Allahabad High Court - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा प्रो. पीडी हजेला गोल्ड मेडल एमए अर्थशास्त्र प्रथम सेमेस्टर के लिए चयनित छात्र मानस मुकुल दास के चयन को रद्द कर दिया है और इस अवार्ड के लिए सर्वाधिक अंक पाने वाले छात्र का चयन करने का निर्देश दिया है। परास्नातक अर्थशास्त्र के छात्र अभिषेक कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने दिया है।

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कोर्ट ने दीक्षांत पदकों के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई पूरी सूची को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस प्रकार से इसे तैयार किया गया है, उसके मद्देनजर अदालत न सिर्फ अर्थशास्त्र बल्कि संस्कृत व दर्शनशास्त्र जैसे विषयों की मेडल सूची भी रद्द करना चाहती है, मगर आठ नवंबर को आयोजित दीक्षांत समारोह के कार्यक्रम को देखते हुए वह ऐसा नहीं कर रहे हैं और फिलहाल सिर्फ एमए प्रथम सेमेस्टर अर्थशास्त्र के लिए चयनित छात्र का ही रद्द कर रहे हैं। कोर्ट ने दीक्षांत के पदकों की सेमेस्टर ग्रेड पॉइंट एवरेज (एसजीपीए) के आधार पर बनाई गई पूरी सूची को आधारहीन और गलत माना।

 

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याची का कहना था कि प्रोफेसर हजेला गोल्ड मेडल के लिए चयनित छात्र से उसे अधिक अंक प्राप्त हुए हैं, इसके बावजूद चयन समिति ने उसका चयन न करके उससे कम अंक पाने वाले छात्र का चयन मेडल देने के लिए किया है। इस पर कोर्ट ने विश्वविद्यालय से पूछा था कि मेडल देने के लिए क्या कोई गाइड लाइन का पालन किया जाता है। सूची तैयार करने का क्या आधार है। विश्वविद्यालय की ओर से इसका कोई माक़ूल जवाब नहीं दिया जा सका। विश्वविद्यालय के अधिवक्ता का कहना था कि ऐसी कोई गाइड लाइन नहीं है। परीक्षा समिति इस पर निर्णय लेती है। कोर्ट ने परीक्षा समिति को वैधानिक संस्था नहीं माना।

याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्रनाथ सिंह ने कहा कि संस्कृत और दर्शनशास्त्र में पिछले सेमेस्टर के पूरे अंक जोड़े गए हैं, जबकि अर्थशास्त्र में मात्र 10 प्रतिशत अंक जोड़कर ही अगले सेमेस्टर में प्रोन्नति दी गई, जो कि दोष पूर्ण है। हालांकि विश्वविद्यालय संस्कृत और दर्शनशास्त्र में अपनाए गए तरीक़े पर भी स्पष्टीकरण नहीं दे पाया।
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