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दक्षिण-पूर्व एशिया की संस्कृति में दक्षिण भारत का योगदान अहम

Fri, 12 Feb 2016 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद संग्रहालय में बृहस्पतिवार को ‘भारतीय मानसून और दक्षिण पूर्व एशिया: सभ्यताओं का सम्मिश्रण’ विषय पर दो दिनी संगोष्ठी शुरू हुई। भारतीय अनुसंधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. दयानाथ त्रिपाठी ने कहा कि यद्यपि भारतीय इतिहासकारों ने वृहत्तर भारत की कल्पना करते हुए दक्षिण-पूर्व एशिया की संस्कृति को भारतीय संस्कृति का अंग बताया था, लेकिन इसके प्रचार में दक्षिण भारत के योगदान को विशेष रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए। प्रोे. हरिदत्त शर्मा ने दक्षिण-पूर्व एशिया में संस्कृत भाषा के प्रसार और प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने अपने थाईलैंड से जुड़े प्रसंगों को भी बुलाया।
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संग्रहालय निदेशक गौरव कृष्ण बंसल ने कहा कि संगोष्ठी दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय संस्कृति और पुरातत्व के समीक्षा के नये आयाम खोलेगी। प्रो. विद्याधर मिश्र और डॉ. वी. सिल्वा कुमार ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन व संयोजन सुनील गुप्ता और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ओए वानखेड़ेे ने किया। कार्यक्रम में डॉ. राम नरेश तिवारी पिंडीवासा, लोक सेवा आयोग सचिव एसके सिंह, प्रो. ओम प्रकाश, प्रो. यूसी चट्टोपाध्याय, प्रो. अनामिका राय, प्रो. सुनीति पांडेय, प्रो. सालेहा हमीद, रविनंदन, अखिलेश मिश्र, अरिंदम घोष आदि लोग मौजूद रहे।
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