इलाहाबाद। अखिल भारतीय रामायण मेला समिति की ओर से काली मार्ग स्थित टीकरमाफी के शिविर में चल रहे तीन दिनी रामायण मेला के दूसरे दिन स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी की अध्यक्षता में प्रवचन हुआ। स्वामी वासुदेवानंद ने राम नाम की महिमा का बखान किया। हरिचैतन्य ब्रह्मचारी ने कल्पवास की परंपरा को अनादिकाल से सिद्ध करते हुए कहा कि ये संत नारायण स्वरूप हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में रामनरेश त्रिपाठी पिंडीवासा रहे। इसके बाद हुई रामायण शोध संगोष्ठी में डॉ. सभापति मिश्र, कुटेश्वर नाथ त्रिपाठी, डॉ. आदर्श मिश्र, डॉ. शंभुनाथ त्रिपाठी ने रामनाम की समसामयिकता को स्पष्ट किया। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्जवलन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई। इसके बाद हुए कवि सम्मेलन में पं. राम लखन शुक्ल, डॉ. अल्पनारायण त्रिपाठी, सुनैना त्रिपाठी, अवध नारायण शुक्ला, शिवराम उपाध्याय, नजर इलाहाबादी, महक जौनपुरी, तलब जौनपुरी, कैलाशनाथ, डॉ. कृष्णावतार त्रिपाठी, शिव प्रसाद गुप्त, दयाराम गुप्त, दयाशंकर पांडेय, डॉ. राजाराम शुक्ला, डॉ. राजेंद्र त्रिपाठी, रसिकेश, हरिश्चंद्र पांडेय आदि ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम संचालन अंशुल और तीर्थराज पांडेय ने आभार व्यक्त किया।