अदालत ने 18 साल पुराने मुकदमे में सौ साल के बुजुर्ग सहित दस लोगों को सजा सुनाई है, जबकि गैरइरादतन हत्या के लिए इसी में से एक अभियुक्त को पांच साल का कारावास मिला है। मामला महज इतना था कि दो परिवारों के बीच बच्चों की बात को लेकर ईंट-पत्थर चले तो एक वृद्ध महिला भी इसमें घायल हो गई। बाद में उसकी मृत्यु हो गई। कोर्ट ने साक्ष्यों के परीक्षण और गवाहों को सुनने के बाद सौ साल के जहांगीर सहित नौ लोगाें को छह-छह माह की कैद और अभियुक्त रामकुमार को गैर इरादतन हत्या के आरोप में पांच साल की कैद और एक हजार के जुर्माने की सजा सुनाई है। घटना में गंभीर रूप से घायल वृद्ध महिला इमरती देवी की मौत हो गई थी। यह आदेश एडीजे महताब अहमद ने एडीजीसी एसएल कुशवाहा को सुनकर दिया है।
अभियोजन केअनुसार मामला फूलपुर थाना के मेहंदीपुर पूरेइना का है। वादी संतलाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 24 मार्च 1997 को बच्चों के आपसी विवाद को लेकर जहांगीर के लड़कों ने इंद्रजीत को मार-पीट दिया था, जिसकी रिपोर्ट लिखाने वादी थाने जा रहे थे। इस बात की जानकारी होने पर अभियुक्तगण लाठी-डंडा लेकर आए और वादी के परिवार के लोगों पर हमला कर दिया । ईंट-पत्थर चला जिसमें वादी की मां इमरती देवी, भाभी अनारा देवी और अन्य लोगों को चोटें आईं। घटना में इमरती देवी गंभीर रुप से घायल हो गईं। जिनको अस्पताल ले जाते समय रास्ते में सहसों के पास मौत हो गई थी।
पुलिस ने जहांगीर(100), और उनके पुत्रों लालपत्ती(50), राम कुमार(36), राज कुमार(37), देव नारायण(60), हनुमंत प्रसाद और सीताराम, राम शिरोमणि(55), महानंद(36) ,बुलाकी लाल (77) और दो अन्य जिनकी दौरान मुकदमा मृत्यु हो गई बरसाती और मोती लाल के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन ने आरोप साबित करने में आठ गवाहों को पेश किया। कोर्ट ने गैर इरादतन हत्या का आरोप साबित होने पर अभियुक्त राम कुमार को पांच साल की कैद और एक हजार के जुर्माने की सजा और शेष अन्य अभियुक्तों को छह -छह माह की कैद की सजा सुनाई है।