अमेरिका ने इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया है, लेकिन स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित शहरों की सूची में इलाहाबाद का नाम न होने पर नगर निगम के अफसरों को झटका लगा है। बृहस्पतिवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने देश के 20 शहरों के नामों की घोषणा की। इसमें इलाहाबाद तो दूर, उत्तर प्रदेश का कोई भी शहर शामिल नहीं है।
पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे के दौरान इलाहाबाद समेत अजमेर और विशाखापट्टम को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की घोषणा हुई थी। इसके बाद से अब तक अमेरिका, आईबीएम की टीमों के साथ केंद्रीय और प्रदेश स्तर के अफसर इलाहाबाद का कई बार दौरा चुके हैं। शहर को किस तरह स्मार्ट बनाया जाएगा, इस पर भी तकरीबन योजना तैयार हो चुकी है। स्मार्ट सिटी में रेट्रोफीट एरिया के तहत किसी एक मोहल्लों को नए सिरे से विकसित करना, पैन सिटी के तहत स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम तथा बिजली, पानी, स्मार्ट मीटरिंग, आईटी कनेक्टिविटी, नॉन व्हीकल जोन, पार्किंग, सोलर स्ट्रीट लाइट, सुरक्षा, प्रयाग इंसीडेंट मैनेजमेंट के तहत मेला क्षेत्र की सड़कों का चौड़ीकरण, श्रद्धालुओं को रिस्ट बेल्ट आदि ढेर सारे काम होने हैं। रेट्रोफीट एरिया के तहत कटरा को विकसित करने का खाका भी तैयार हो चुका है। इसके तहत चंद्रशेखर आजाद पार्क से कटरा होकर ममफोर्डगंज के कुछ हिस्से को शामिल किया गया है।
स्मार्ट सिटी पर नागरिकों की सहभागिता के तहत केंद्र सरकार ने लोगों का राय मांगी थी। 30 नवंबर तक इसके लिए इलाहाबाद से तकरीबन 1.70 लाख लोगों ने ऑनलाइन सुझाव दिए। इसमें सिटी लेविल के लिए 30, एरिया बेस्ट डेवलपमेंट के लिए 55 एवं पैन सिटी सैल्यूशन के लिए 15 अंक निर्धारित थे। इसी के आधार पर स्मार्ट सिटी का चयन होना था। उम्मीद की जा रही थी कि केंद्र सरकार की ओर से स्मार्ट सिटी के परिणाम में इलाहाबाद भी शामिल होगा, क्योंकि ऐसा होने पर केंद्र सरकार पांच वर्ष तक हर साल स्मार्ट सिटी के कामों के लिए सौ करोड़ रुपये का फंड देती और इतनी ही रकम प्रदेश सरकार भी देती। परिणाम को लेकर सुबह से निगम के अफसर, कर्मचारियों और पार्षदों में उत्सुकता थी, लेकिन दोपहर बाद 20 स्मार्ट सिटी की सूची में इलाहाबाद का नाम न होने पर निराशा हुई।